नई दिल्ली, June 5, (Political Insight) : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने की घोषणा की। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है। RBI का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां मुद्रास्फीति और आर्थिक विकास, दोनों के लिए चुनौती पेश कर रही हैं।
इस बीच, RBI ने विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। अनिवासी भारतीयों (NRI), भारत के प्रवासी नागरिकों (OCI) और अन्य विदेशी भारतीयों को बिना सेबी पंजीकरण के भारतीय शेयर बाजार में अधिक निवेश की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा, पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) के तहत 15, 30 और 40 वर्ष की नई सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल किया गया है तथा विदेशी निवेश पर कुछ प्रमुख प्रतिबंध भी हटाए गए हैं।
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है।
रुपये में आई मजबूती
RBI की घोषणाओं के बाद भारतीय रुपये में मजबूती देखने को मिली। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.24 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर की तुलना में लगभग 50 पैसे की मजबूती दर्शाता है। जानकारों का कहना है कि RBI के कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और देश का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी झटकों से निपटने में सक्षम है।
मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे
RBI गवर्नर ने कहा कि मार्च (3.4 प्रतिशत) और अप्रैल (3.5 प्रतिशत) में हेडलाइन CPI मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रही। उन्होंने बताया कि खाद्य मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि ईंधन कीमतें स्थिर रहने से ईंधन मुद्रास्फीति नियंत्रित रही। वहीं, कोर मुद्रास्फीति 3.7 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है।