नई दिल्ली, May 13, (Political Insight) : भारत के प्रसिद्ध बैंकर और Kotak Mahindra Bank के संस्थापक उदय कोटक ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि भारत में आर्थिक हालात आने वाले समय में तेजी से और काफी हद तक बिगड़ सकते हैं। यह बयान उन्होंने मंगलवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की वार्षिक बिजनेस समिट में दिया। उदय कोटक ने कहा कि हमें संभावित आर्थिक संकट को लेकर पहले से तैयारी करनी चाहिए, बजाय इसके कि उसके आने का इंतजार किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा, “सबसे खराब स्थिति के लिए भी खुद को तैयार रखना जरूरी है।” उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर अब धीरे-धीरे आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है।
आने वाले दिनों में बिगड़ सकते हैं हालात
उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अभी तक पूरी तरह से महसूस नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसका असर और अधिक गंभीर हो सकता है। उनके मुताबिक, उपभोक्ताओं ने अभी तक असली दबाव महसूस नहीं किया है, लेकिन स्थिति तेजी से बदल सकती है। उदय कोटक ने यह भी कहा कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम हो जाए तो स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हो सकती है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इसकी संभावना अनिश्चित है।
हिंदू दर्शन के ‘त्रिमूर्ति’ सिद्धांत को अपनाना जरूरी
भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बात करते हुए उन्होंने हिंदू दर्शन के ‘त्रिमूर्ति’ सिद्धांत का उल्लेख किया और कहा कि भारत को अब केवल संरक्षण (विष्णु) की सोच से आगे बढ़कर सृजन (ब्रह्मा) और परिवर्तन (महेश) की मानसिकता अपनानी होगी। उनके अनुसार, देश में अभी भी अधिकतर ध्यान मौजूदा संसाधनों को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है, जबकि अब नए निर्माण और नवाचार पर अधिक फोकस होना चाहिए।
शक्ति और प्रतिस्पर्धा की है दुनिया
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया एक बार फिर उस दौर की ओर बढ़ रही है जहां शक्ति और प्रतिस्पर्धा का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे समय में केवल सरकारी नीतियों पर निर्भर रहने के बजाय निजी क्षेत्र और भारतीय कंपनियों को मजबूत करना जरूरी है। कोटक ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी वास्तविक ताकत उसकी सरकार नहीं बल्कि उसका मजबूत बिजनेस सेक्टर है, जो वैश्विक मांग को पूरा करता है। इसी तरह भारत को भी अपने उद्योग और कंपनियों को इतना सक्षम बनाना होगा कि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और देश की आर्थिक ताकत को बढ़ा सकें।