Commercial LPG cylinder के बढ़े दाम, रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा

Commercial LPG cylinder के बढ़े दाम, रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा

नई दिल्ली,1अप्रैल (Political Insight)- नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत ही आम जनता और कारोबारियों के लिए महंगाई का झटका लेकर आई है। 1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (Commercial LPG cylinder) की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर इसका असर तुरंत दिखने की संभावना है।

आपको बता दे कि राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 195.50 रुपए बढ़कर 2078.50 रुपए पहुंच गई है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि मार्च की शुरुआत में यही सिलेंडर 1768.50 रुपए का था, जो कुछ ही दिनों में 1883 रुपए हो गया था। यानी, एक ही महीने में कुल 310 रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऐसे में, लगातार बढ़ती कीमतों ने व्यापारियों की लागत को काफी बढ़ा दिया है।

वहीं, यह बढ़ोतरी सिर्फ एक शहर तक सीमित भी नहीं है। कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर 2208 रुपए तक पहुंच गया है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 2031 रुपए और चेन्नई में 2246.50 रुपए हो गई है। इससे साफ है कि देशभर में गैस की कीमतों में एक जैसा रुझान देखने को मिल रहा है और महंगाई का असर हर बड़े शहर में महसूस किया जा रहा है।

होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर पर सीधा असरः-

ज़ाहिर है कि इस तरह से कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर पड़ने वाला है। दरअसल, इस सेक्टर में गैस एक जरूरी खर्च होता है। ऐसे में, जब इसकी कीमतें बढ़ती हैं तो कारोबारियों के पास लागत बढ़ने का दबाव आता है।

आमतौर पर, इस तरह की स्थिति में व्यापारी कीमतों को संतुलित करने के लिए खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा देते हैं। इसका मतलब साफ है- अब बाहर खाना पहले से महंगा पड़ सकता है।

हालांकि, फिलहाल अभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी राहत की खबर है, लेकिन कब तक यह राहत बनी रहेगी कुछ कहा नही जा सकता हैं। 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी भी 913 रुपए बनी हुई है।

लेकिन, विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसी तरह दबाव बना रहा, तो आने वाले समय में घरेलू गैस की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

दरअसल, इस पूरी स्थिति के पीछे वैश्विक कारण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव-खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच टकराव- ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने भी कच्चे तेल और गैस की कीमतों को ऊपर धकेला है।

कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगाई के दबाव के साथ हुई है। एक तरफ जहां कारोबारियों की लागत बढ़ रही है, वहीं आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी इसका असर पड़ना तय है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।

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