नई दिल्ली, 1अप्रैल (Political Insight)- वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम हवाई यात्रियों और घरेलू विमानन उद्योग को राहत देने के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी (ATF Price Hike) को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके दाम में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल की आशंका जताई जा रही थी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, यह निर्णय वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ गया है। दरअसल, यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक अहम हिस्सा है, जहां किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और नागर विमानन मंत्रालय के समन्वय से यह तय किया गया कि कीमतों में बढ़ोतरी को चरणबद्ध और सीमित रखा जाए। इसी के तहत घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत में करीब 25% यानी लगभग 15 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, ताकि हवाई किराए में अचानक भारी उछाल से यात्रियों को राहत मिल सके।
हालांकि, यह राहत केवल घरेलू उड़ानों तक ही सीमित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरलाइंस को वैश्विक बाजार के अनुसार पूरी बढ़ी हुई कीमत चुकानी होगी। 1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, राजधानी नई दिल्ली में ATF की कीमत बढ़कर करीब 1,04,927 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638 रुपये थी।
केंद्रिय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने इस फैसले को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण विमानन क्षेत्र पर भारी दबाव था। उन्होंने PM मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आभार जताते हुए कहा कि इससे यात्रियों को महंगे किराए से राहत मिलेगी और एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति भी स्थिर बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ATF की कीमतें एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 35-45% तक हिस्सा होती हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में अचानक बड़ी वृद्धि सीधे टिकट दरों को प्रभावित करती है। सरकार के इस फैसले से घरेलू यात्रा सस्ती रहने की संभावना है और एयर ट्रैफिक में गिरावट से भी बचाव होगा।
इसके अलावा, इस निर्णय का असर कार्गो और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी सकारात्मक पड़ेगा, क्योंकि हवाई माल ढुलाई की लागत नियंत्रित रहने से व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव कम होगा।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया (West Asia) में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। हालांकि, तेल कंपनियों के मुताबिक ATF की कीमतों में वास्तविक वृद्धि करीब 8.5% ही हुई है, जबकि पहले 100% से अधिक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इससे न केवल आम यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र को भी स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।