न्यूयॉर्क/नई दिल्लीः- अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन और विदेश नीति को लेकर जन असंतोष तेज़ होता नजर आ रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। “नो किंग्स” (No Kings) के नारे के साथ आयोजित इन प्रदर्शनों में लोगों ने प्रशासन की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी नाराज़गी जताई। आयोजकों के मुताबिक, यह एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा था, जिसके तहत पूरे देश में 3,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस विरोध की सबसे बड़ी झलक सेंट पॉल स्थित मिनेसोटा स्टेट कैपिटल में देखने को मिली, जहां भारी संख्या में लोग जुटे। अनुमान है कि इस मुख्य रैली में करीब दो लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाले, नारे लगाए और पोस्टर-बैनरों के जरिए अपनी मांगें सामने रखीं।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों और ईरान (Iran) के साथ बढ़ते तनाव को लेकर था। कई शहरों में लोग सड़कों के किनारे कतार बनाकर खड़े हुए, जबकि कुछ स्थानों पर चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर इकट्ठा होकर सामूहिक विरोध दर्ज कराया गया।
देश के प्रमुख शहरों न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, लॉस एंजिल्स, शिकागो और सैन फ्रांसिस्कोमें भी हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इन जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों के बाहर रैलियां कीं और मार्च निकालकर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
लोगों ने अमेरिकी संविधान की एक बड़ी प्रतिकृति के साथ प्रदर्शन किया। आयोजकों का कहना था कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है। कई जगहों पर विरोध कार्यक्रमों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भाषण भी शामिल रहे।
इस दौरान नेताओं ने भी प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाए। एक प्रतिनिधि जॉन लार्सन ने कहा, “आज हम यहां यह कहने के लिए इकट्ठा हुए हैं कि अमेरिका में कोई राजा नहीं होता।” और जनता की आवाज ही सर्वोपरि है।
वहीं, सीनेटर Kirsten Gillibrand ने सरकार से आम लोगों के मुद्दों—जैसे महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं-पर ध्यान देने की अपील की।
विरोध प्रदर्शनों के बीच लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश को किसी भी तरह की तानाशाही की ओर नहीं जाने दिया जाएगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनता का एकजुट रहना जरूरी है।