नई दिल्लीः- भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों को लेकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार पर सख्ती बढ़ा दी है। आयोग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को नामांकन के समय अपने प्रामाणिक सोशल मीडिया खातों का विवरण एफिडेविट में देना अनिवार्य होगा।
आपको बता दे कि आयोग ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों तथा छह राज्यों में उपचुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था। इसी क्रम में अब डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चुनावी विज्ञापनों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इन निर्देशों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या उम्मीदवार को TV, रेडियो, ई-पेपर, सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट आधारित प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापन जारी करने से पहले मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (MCMC) से पूर्व-प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के कोई भी विज्ञापन प्रसारित नहीं किया जा सकेगा।
उम्मीदवार जिला स्तर की MCMC में विज्ञापनों के प्रमाणीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि राज्य मुख्यालय वाली राजनीतिक पार्टियां राज्य स्तर की समिति से अनुमति लेंगी। समिति के निर्णय के खिलाफ अपील के लिए राज्य स्तर पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की अध्यक्षता में अपीलीय समिति का गठन भी किया गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि MCMC मीडिया में पेड न्यूज और संदिग्ध प्रचार पर कड़ी निगरानी रखेगी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करेगी।
इसके अलावा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 77(1) और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत राजनीतिक दलों को चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर सोशल मीडिया और इंटरनेट प्रचार पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा चुनाव आयोग को देना होगा। इसमें विज्ञापनों, कंटेंट निर्माण और सोशल मीडिया संचालन पर किए गए खर्च शामिल होंगे।
दरअसल, चुनावों के दौरान फर्जी खबरों और भ्रामक सूचना पर नियंत्रण के लिए 19 मार्च 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस और IT नोडल अधिकारियों तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में गलत सूचना के मामलों में त्वरित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
आयोग के इन कदमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बढ़ाने और चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।