राज्यसभा से 59 सांसदों की विदाई, PM बोले राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं आता

राज्यसभा से 59 सांसदों की विदाई, PM बोले राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं आता

नई दिल्ली:- राज्यसभा में आज 20 राज्यों से जुड़े 59 सदस्यों को औपचारिक विदाई दी गई। सेवानिवृत्त होने वाले इन सांसदों में नौ महिला सदस्य भी शामिल हैं। सदन में आयोजित विदाई समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सदस्यों के संसदीय लोकतंत्र में योगदान को सराहा और कहा कि उनका अनुभव आगे भी देश के लिए मूल्यवान रहेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में कभी पूर्ण विराम नहीं आता। उन्होंने कहा कि “खट्टे-मीठे अनुभव” लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन जब भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां आती हैं, तब सदस्य दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर देशहित में एकजुट होते हैं। उन्होंने राज्यसभा को “एक खुला विश्वविद्यालय” बताते हुए कहा कि यहां से जनप्रतिनिधियों को राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और समृद्ध होने का अवसर मिलता है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उपसभापति हरिवंश के कार्यकाल का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही को संतुलित ढंग से संचालित किया और सभी पक्षों का विश्वास जीतने का प्रयास किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं H.D देवेगौडा, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार के लंबे संसदीय अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसद और जनसेवा को समर्पित किया है, और नए सदस्यों को उनसे सीख लेनी चाहिए कि किस तरह सदन में सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभाई जाती है।

इससे पहले, राज्यसभा के सभापति C.P. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्यों की सेवानिवृत्ति राज्यसभा की संवैधानिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया जहां संस्थागत स्थिरता बनाए रखती है, वहीं नए सदस्यों के लिए अवसर भी पैदा करती है और संसदीय बहस को नई ऊर्जा देती है। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्ति को सार्वजनिक जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई भूमिकाओं की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए।

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी विदाई लेते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग कभी वास्तव में सेवानिवृत्त नहीं होते, क्योंकि उनमें देश सेवा का जज्बा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अन्य सदस्यों के अनुभवों से सीखने का प्रयास करते रहे हैं।
राज्यसभा की व्यवस्था क्या कहती है?

आपको बता दे कि राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। यह व्यवस्था सदन में अनुभव और नई सोच के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है।

क्या हैं राजनीतिक मायने:

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सदस्यों की सेवानिवृत्ति के बाद विभिन्न दलों को नए चेहरों को राज्यसभा भेजने का मौका मिलेगा, जिससे आने वाले समय में सदन की राजनीतिक और विधायी दिशा पर असर पड़ सकता है।

विदाई समारोह के साथ ही सदन में भावुक पल भी देखने को मिले, जहां विभिन्न दलों के नेताओं ने एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा किए और संसदीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

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