क्षेत्रीय संकट के बीच पड़ोसियों ने की भारत से डीजल की मांग

क्षेत्रीय संकट के बीच पड़ोसियों ने की भारत से डीजल की मांग

नई दिल्ली:- पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत से उसके कुछ पड़ोसी देशों ने डीजल आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका ने भारत से ईंधन आपूर्ति की मांग की है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवालने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत इन अनुरोधों पर विचार कर रहा है और फैसला देश की ऊर्जा जरूरतों तथा उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।

जायसवाल ने बताया कि भारत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है, खासकर अपने पड़ोसी देशों के लिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की सरकार की ओर से डीजल आपूर्ति के लिए औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है।

उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग का जिक्र करते हुए बताया कि 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से विभिन्न माध्यमों- जलमार्ग, रेलमार्ग और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति की जा रही है। अक्टूबर 2017 में और नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति के लिए एक व्यापक बिक्री-खरीद समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए थे।

बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका कर रहे ईंधन की मांगः-

प्रवक्ता ने प्रेस को बताया कि बांग्लादेश के अलावा मालदीव और श्रीलंका से भी ईंधन आपूर्ति के लिए अनुरोध मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय देश की घरेलू जरूरतों और डीजल की उपलब्धता को देखते हुए लिया जाएगा।

एक अन्य सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी तरह के संघर्ष में नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान से बचाया जाए। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) के सदस्य देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन का समर्थन नहीं करता और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है।

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