PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की फोन पर बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता

PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की फोन पर बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता

नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने गुरुवार को डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने भारत की ओर से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति के साथ क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की जान जाने और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक सामान के सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन को बनाए रखना भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान और इज़राइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार को भी ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल हमले किए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मिसाइलें इजरायल की राजधानी येरुशलम की ओर दागी गईं, जिनमें से एक मिसाइल पुराने शहर के इलाके में, वेस्टर्न वॉल, अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपुलकर के पास गिरी। इस घटना के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए नमाज रोक दी गई।

वहीं, इजरायली रक्षा बल (IDF) ने दावा किया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने के लिए उनकी रक्षा प्रणाली सक्रिय है। IDF ने बताया कि संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित क्षेत्रों में लोगों के मोबाइल फोन पर अलर्ट संदेश भेजे गए हैं।

IDF ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और अलर्ट मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों में चले जाएं। अधिकारियों ने कहा कि जब तक नया निर्देश जारी न हो, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भारत समेत कई देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

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