पटनाः- पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान कथित अनियमितताओं और उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए चुनावी शपथ पत्रों (एफिडेविट) में संभावित विसंगतियों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य विधानसभा के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इन विधायकों के खिलाफ बजट सत्र के दौरान विभिन्न याचिकाएं दायर की गई थीं।
अलग-अलग तिथियों पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद विभिन्न न्यायाधीशों की पीठों ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के 32 और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 8 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी-लेनिनवादी के एक-एक विधायक से भी स्पष्टीकरण मांगा है
नोटिस प्राप्त करने वालों में विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव तथा राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद शामिल हैं।
क्या है पूरा मामलाः-
न्यायालय में दाखिल इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि कुछ विधायकों ने अपने नामांकन के समय दाखिल शपथ पत्रों में आपराधिक मामलों, संपत्ति, देनदारियों या शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारियों का पूर्ण या सही विवरण नहीं दिया। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्याशियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों और संपत्ति का सही ब्योरा सार्वजनिक करें।
पटला हाईकोर्ट ने संबंधित विधायकों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया (prima facie) तथ्यों में गंभीरता प्रतीत होती है, तो मामले की विस्तृत सुनवाई हो सकती है। दोष सिद्ध होने की स्थिति में सदस्यता रद्द होने या चुनाव को निरस्त किए जाने जैसे परिणाम भी संभव हैं।
राजनीतिक हलकों में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में विधायकों को एक साथ नोटिस जारी होना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और विधायकों के जवाब पर टिकी है।