इंफाल/चुराचांदपुरः- मणिपुर में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति के महज 48 घंटे के भीतर ही राज्य एक बार फिर से हिंसा की आग में झुलस उठा। दक्षिणी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में कुकी-ज़ो समुदाय से जुड़े विधायकों के नई सरकार के गठन में शामिल होने के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़पों में बदल गया।
विरोध कर रहे विभिन्न संगठनों ने जिले में पूर्ण बंद का आह्वान किया था। बंद के दौरान कई इलाकों में तोड़फोड़, आगजनी और सुरक्षा बलों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ते देख प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े और इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं।
सरकार गठन को लेकर नाराजगीः-
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कुकी-ज़ो विधायकों को नई सरकार में शामिल करना समुदाय की भावनाओं के खिलाफ है। उनका कहना है कि जब तक कुकी-ज़ो समुदाय की राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक सरकार गठन की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पहले भी भड़क चुकी है हिंसाः-
गौरतलब है कि मणिपुर पिछले करीब तीन वर्षों से जातीय हिंसा की मार झेल रहा है। मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी, जबकि हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए थे। कई इलाकों में घर, चर्च और धार्मिक स्थल जलाए गए थे।
बीते वर्ष भी चुराचांदपुर और आसपास के पहाड़ी जिलों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई बार झड़पें हुई थीं। केंद्र सरकार को स्थिति संभालने के लिए लंबे समय तक अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी थी।
राजनीतिक स्थिरता पर सवालः-
अब सवाल यह है कि नई सरकार के गठन के तुरंत बाद हिंसा का भड़कना मणिपुर की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर भरोसा बहाल करने में नाकाम रही है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और शांति बहाल करने के लिए सभी पक्षों से बातचीत की जा रही है। हालांकि, बार-बार भड़कती हिंसा ने एक बार फिर मणिपुर के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ये भी पढ़ें-