नई दिल्लीः– बलूचिस्तान में हुए हालिया आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने सख्ती से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को पाकिस्तान के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के आरोप इस्लामाबाद की अपनी अंदरूनी नाकामियों से ध्यान हटाने का पुराना तरीका हैं।
विदेश मंत्रालय ने आरोप को बताया निराधारः-
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह निराधार आरोप लगाने के बजाय बलूचिस्तान के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर ध्यान दे। MEA ने अपने बयान में कहा, “हम पाकिस्तान के बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। हर बार किसी हिंसक घटना के बाद ऐसे दावे करना उसकी आदत बन चुकी है। दमन, क्रूरता और मानवाधिकार उल्लंघनों का उसका रिकॉर्ड जगजाहिर है।”
दरअसल, शनिवार को बलूचिस्तान प्रांत में कई स्थानों पर हमलों की खबर सामने आई थी। इसके बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इन घटनाओं में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया था।
गौरतलब है कि नवंबर 2022 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) द्वारा पाकिस्तान सरकार के साथ संघर्षविराम खत्म किए जाने के बाद देश में आतंकी गतिविधियों में तेजी देखी गई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हमलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
इस बीच, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान में हुए कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि इन हमलों में पाकिस्तानी सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और काउंटर-टेररिज्म यूनिट्स के कर्मियों समेत 80 से अधिक लोग मारे गए हैं। बीएलए ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन हीरो फेज-2’ नाम दिया है।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक बयान में कहा कि ये हमले करीब दस घंटे तक चले और बलूचिस्तान के कई जिलों में एक साथ किए गए। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों का निशाना महत्वपूर्ण सुरक्षा, सैन्य और प्रशासनिक ठिकाने थे।
संगठन के अनुसार, उसके लड़ाकों ने क्वेटा, नोश्की, मस्तुंग, दलबंदिन, कलात समेत कई शहरों में हमले किए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये इलाके पाकिस्तानी सरकार के अहम सैन्य और प्रशासनिक केंद्र माने जाते हैं। BLA ने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के कम से कम 84 जवान मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
BLA ने यह भी दावा किया कि हमलों के दौरान 18 सुरक्षाकर्मियों को बंदी बनाया गया, जबकि 30 से ज्यादा सरकारी संपत्तियों—जिनमें सरकारी कार्यालय, बैंक और जेल शामिल हैं—को नुकसान पहुंचाया गया या कब्जे में लिया गया। इसके अलावा, 20 से अधिक वाहनों को आग लगाए जाने का भी दावा किया गया है।
इस संगठन का कहना है कि उसके लड़ाके कुछ इलाकों में सीमित समय के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गतिविधियों को रोकने और कुछ जोनों पर नियंत्रण स्थापित करने में सफल रहे।
बलूच संगठनों का आरोप है कि बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की ज्यादतियों का सामना कर रहा है, जहां जबरन गायब किए जाने, गैर-न्यायिक हत्याओं और अवैध हिरासत जैसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की घटनाएं सामने आती रही हैं। (स्रोत-प्रसारभारती)
ये भी पढ़ें-