मुंबई:- महाराष्ट्र की राजनीति में कई ऐसे दिग्गज नेता हुए, जिन्होंने कम उम्र में ही सत्ता, संगठन और जनसमर्थन के दम पर अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। लेकिन इन नेताओं का असमय निधन न केवल उनके परिवार और दलों के लिए, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। इनकी अचानक निधन ने कई क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन को प्रभावित किया और राज्य और पार्टी नेतृत्व में एक खालीपन पैदा कर दिया। ऐसे ही कुछ नेताओं के बारे में आज हम यहां बात करने वाले हैं। उनमें ससे कुछ नाम इस प्रकार हैं-
प्रमोद महाजनः-
BJP के दिग्गज नेता प्रमोद महाजन ऐसे ही नेताओं में शामिल थे। BJP के राष्ट्रीय रणनीतिकार और तेज-तर्रार वक्ता प्रमोद महाजन पार्टी के आधुनिक चेहरों में शामिल थे। RSS से राजनीति में आए महाजन मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री बने। मीडिया और शहरी राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ थी। वर्ष 2006 में महज 56 वर्ष की उम्र में गोली लगने से उनका निधन हो गया, जिसने BJP ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को हिला कर रख दिया। उनका निधन का कारण आज भी एक पहेली के रूप में लोगो के सामने हैं।
R.R पाटिलः-
इसी तरह NCP के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री R.R पाटिल, जिन्हें लोग प्यार से ‘आबा’ कहते थे, अपनी साफ-सुथरी छवि और सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते थे। सांगली जिले की तासगांव–कवठे महांकाल विधानसभा सीट से विधायक रहे पाटिल ग्रामीण महाराष्ट्र की मजबूत आवाज थे। 2015 में 57 वर्ष की उम्र में कैंसर से उनका निधन हो गया। उनके जाने से एनसीपी को एक भरोसेमंद और ज़मीनी नेता की बड़ी कमी खली।
आनंद दिघेः-
शिवसेना के कद्दावर नेता आनंद दिघे का नाम ठाणे की राजनीति के बिना अधूरा माना जाता है। बालासाहेब ठाकरे के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाने वाले दिघे ने ठाणे में शिवसेना को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। कार्यकर्ताओं में उनकी जबरदस्त पकड़ थी। वर्ष 2001 में 49 वर्ष की उम्र में एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। उनकी मौत के बाद ठाणे की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई।
विनायक मेटेः-
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे विनायक मेटे ने शिवसंग्राम पार्टी के जरिए मराठा समाज की आवाज़ को सड़कों से सदन तक पहुंचाया। वे विधान परिषद के सदस्य भी रहे और मराठा युवाओं में काफी लोकप्रिय थे। 2022 में 52 वर्ष की उम्र में सड़क हादसे में उनका निधन हो गया, जिससे मराठा आंदोलन को बड़ा झटका लगा।
गोपीनाथ मुंडेः-
BJP के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र की मराठवाड़ा,O.B.C और ग्रामीण राजनीति का बड़ा चेहरा थे। वे बीड लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे, मुंडे केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री भी बने। ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में उनकी गहरी पकड़ थी। 2014 में 65 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से उनका अचानक निधन हो गया, जिसे भाजपा के लिए अपूरणीय क्षति माना गया। मुंडे को BJP का ग्रासरूट लीडर माना जाता था, जिनकी पकड़ मराठवाड़ा से लेकर दिल्ली तक थी। उनकी मौत से भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर बड़ा नुकसान हुआ।
विलासराव देशमुखः-
कांग्रेस के सबसे सौम्य और लोकप्रिय वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख मराठवाड़ा, खासकर लातूर क्षेत्र की राजनीति का मजबूत चेहरा थे। सौम्य व्यवहार और संतुलित नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले देशमुख का 2012 में 67 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके जाने से कांग्रेस नेतृत्व में न सिर्फ नेतृत्व बल्कि मराठवाड़ा का मजबूत चेहरा भी खोया जिसके बाद महाराष्ट्र कांग्रेस नेतृत्व में स्पष्ट खालीपन नजर आया।
मधुकरराव पिचडः-
NCP के वरिष्ठ नेता मधुकरराव पिचड आदिवासी राजनीति और सहकार आंदोलन का बड़ा नाम थे। अकोले विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे पिचड ने आदिवासी मुद्दों को राज्य की राजनीति में प्रमुखता से उठाया। 2014 में 56 वर्ष की उम्र में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया।
लक्ष्मण जगतापः-
पुणे की शहरी राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले भाजपा नेता लक्ष्मण जगताप चिंचवड़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक रहे। विकास कार्यों और औद्योगिक क्षेत्र में उनकी पकड़ के कारण वे खासे लोकप्रिय थे। 2023 में 59 वर्ष की उम्र में बीमारी से उनका निधन हो गया, जिससे पुणे की राजनीति में भी एक खालीपन पैदा हुआ।
विनायक मेटेः-
मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेता विनायक मेटे शिवसंग्राम पार्टी के संस्थापक थे। वे विधान परिषद सदस्य (MLC) रहे और मराठा समाज में उनकी मजबूत पकड़ थी। 2022 में 52 वर्ष की उम्र में एक सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। उनकी मौत से मराठा आरक्षण आंदोलन को बड़ा झटका लगा।
अजीत पवारः-
महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री और NCP नेता अजित पवार का निधन हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार चार अन्य लोगों की भी मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब मुंबई से बारामती आ रहा चार्टर्ड विमान रनवे के पास क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया।
DGCA से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस मुंबई- बारामती चार्टर प्लेन में सवार कुल पांच लोग हादसे में नहीं बच पाए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल से जुड़े वीडियो भी सामने आ रहें हैं, जिनमें विमान को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखा जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीते दो दशकों में विभिन्न दलों के कई उभरते और संभावनाशील युवा नेताओं की असमय मौत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता को प्रभावित किया है। हादसों और बीमारियों के चलते कई ऐसे चेहरे राजनीति से चले गए, जिनसे भविष्य में बड़ी उम्मीदें थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन नेताओं का असमय निधन सिर्फ व्यक्तिगत क्षति नहीं था, बल्कि इससे कई क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन बिगड़ा, दलों की रणनीतियों पर असर पड़ा और कई जनआंदोलन अधूरे रह गए। महाराष्ट्र की राजनीति में इन नेताओं की कमी आज भी एक खालीपन के रूप में महसूस की जाती है।
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