तेहरान/नई दिल्लीः- ईरान में महंगाई के खिलाफ 28 दिसंबर से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को हटाने की मांग वाले व्यापक आंदोलन के रूप में बदल गया हैं। देशभर में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जबकि हालात को देखते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोलियों से अब तक कम से कम 2000 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरें हैं। ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका की साजिश होने का आरोप लगाया है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने कहा कि, प्रदर्शनकारी अमेरिका समर्थित भाड़े के लोग हैं और सरकार ने इस “विदेशी साजिश” को नाकाम कर दिया है। उधर, अमेरिका ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर दमन इसी तरह जारी रहा तो मजबूत सैन्य हमले के लिए ईरान तैयार रहे। खामेनेई ने चेतावनी दी कि ईरानी जनता अपनी संप्रभुता और पहचान की रक्षा के लिए एकजुट है और कहा कि ईरान हर तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर इसी तरह दमन जारी रहा तो अमेरिका बहुत मजबूत सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। इसके जबाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान निष्पक्ष बातचीत के लिए भी तैयार है, लेकिन वह युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
ईरान इंटरनेशनल से मिली जानकारी के अनुसार, ईरान ने ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली के राजदूतों को तलब कर उनके देशों पर प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
सीबीएस न्यूज से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन विकल्पों पर जानकारी दी गई है। इनमें सैन्य हमला, साइबर ऑपरेशन और प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीति शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि इन विकल्पों को एक साथ भी अपनाया जा सकता है, हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले हैं।
गौरतलब हैं कि इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि वह ईरानी जनता के साथ खड़े हैं और उम्मीद करते हैं कि देश में लोकतांत्रिक बदलाव आएगा। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने मौजूदा ईरानी सरकार को अवैध बताते हुए उस पर अपने ही नागरिकों की हत्या का आरोप लगाया।
इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में चल रहे “नरसंहार” को चुपचाप नहीं देखेंगे। उन्होंने कहा कि लोग गरीबी, महंगाई, पानी की कमी और बुनियादी जरूरतों की कमी के कारण सड़कों पर उतरे हैं और अमेरिका उन्हें मरते नहीं देख सकता।
आपको बताते चले कि, बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। अमेरिकी दूतावास ने वर्चुअल सुरक्षा परामर्श जारी कर नागरिकों को सलाह दी है कि वे बिना अमेरिकी सरकार की सहायता पर निर्भर हुए, अपने इंतजाम से जल्द से जल्द देश छोड़ दें।
वहीं इस पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी पुलिस प्रमुख अहमदरेज़ा रादान ने कहा कि यदि अमेरिका ने फिर से कोई कदम उठाया तो उसे उसका करारा जवाब मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले हमलों के जवाब को अमेरिका अभी तक पचा नहीं पाया है।
उधर, निर्वासित ईरानी राजकुमार रजा पहलवी ने सोमवार को सीबीएस न्यूज पर प्रसारित एक इंटरव्यू में कहा है कि वह ट्रंप प्रशासन के सीधे संपर्क में हैं और मौजूदा हालात “गेम-चेंजर” साबित हो सकते हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत और सोवियत संघ के पतन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दुनिया दमनकारी सरकारों को ललकारती है, तभी बदलाव संभव होता है।
ईरान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस उथल-पुथल पर टिकी हैं, जो क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकती है।