नई दिल्लीः- राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आज रेलवे भूमि के बदले नौकरी (Land for Job) घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिजनों और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।
आज अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच सामग्री के आधार पर लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वीयादव और तेज प्रताप यादव, पुत्री मीसा भारती और हेमा यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपः-
आपको बताते चले कि, विशेष CBI न्यायाधीश ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से एक आपराधिक साजिश रची और रेलवे में नौकरी को एक “हथियार” की तरह इस्तेमाल करते हुए निजी लाभ हासिल किया।
अदालत के अनुसार, यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। इस दौरान कथित तौर पर रेलवे में ग्रुप-डी( Group-D) की नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई।
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, रेलवे में नियुक्तियों के बदले लालू परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक निजी कंपनी के नाम पर बाजार मूल्य से काफी कम दरों पर जमीन का हस्तांतरण कराया गया। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि इन जमीन सौदों में अधिकतर लेन-देन नकद के माध्यम से किया गया, ताकि वास्तविक मूल्य और लेन-देन को छिपाया जा सके। CBI का यह भी कहना है कि जिन उम्मीदवारों को नौकरी दी गई, उनके चयन में नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया और उन्हें अवैध रूप से लाभ पहुंचाया गया।
प्रर्वतन निदेशालय(ED) भी इस मामले की जॉच कर रही हैः-
इस मामले से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय ( ED) कर रहा है। ईडी पटना में जमीन हस्तांतरण और उससे जुड़े कथित अवैध धन के लेन-देन की जांच कर रही है। एजेंसी पहले ही इस मामले में कई आरोपियों से पूछताछ कर चुकी है और संपत्तियों की जांच जारी है।
आपको बता दे कि अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब मामले में नियमित सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। अभियोजन पक्ष सबूत पेश करेगा, जबकि आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
यह मामला बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब लालू परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं और विपक्षी दल इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं।