लद्दाख में भड़की हिंसा पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो सरकार की दिक्कतें उनकी आजादी से कहीं ज्यादा बढ़ जाएंगी। मैं देख रहा हूं कि पीएसए (जनसुरक्षा कानून) के तहत मुझे दो साल के लिए जेल भेजने की तैयारी हो रही है। मैं इसके लिए तैयार हूं। लेकिन याद रखिए, जेल में सोनम वांगचुक सरकार के लिए बाहर के वांगचुक से कहीं ज्यादा परेशानी का सबब बनेगा।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार (24 सितंबर 2025) हिंसक प्रदर्शन हुआ. गुस्साई भीड़ ने CRPF की गाड़ी, पुलिस वैन और कई अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया. गृह मंत्रालय ने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भड़काऊ बयानों ने भीड़ को उकसाया है. सोनम वांगचुक ने इसे बलि का बकरा बनाने की रणनीति बताया.
जलवायु कार्यकर्ता ने हिंसा भड़कने के लिए लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, खासकर क्षेत्र के युवाओं में व्याप्त हताशा को जिम्मेदार ठहराया और तर्क दिया कि असली वजह ‘‘छह साल की बेरोजगारी और हर स्तर पर अधूरे वादों की हताशा है.
उन्होंने सरकार पर नौकरी में आरक्षण पर सफलता का दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य का दर्जा एवं लद्दाख के आदिवासी दर्जे और पर्यावरण की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के विस्तार की मुख्य मांगों पर पांच साल की शांतिपूर्ण अपीलों के बाद भी गौर नहीं किया गया हैं। गृहमंत्रालय ने देर रात बयान जारी कर कहा कि हिंसा भड़काने के पीछे राजनीतिक रूप से प्रेरित व्यक्तियों और वांगचुक जैसे नेताओं के भड़काऊ बयान जिम्मेदार हैं। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि कोई भी पुराना या भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर न फैलाए। मंत्रालय के अनुसार, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस से लगातार संवाद जारी है। उच्च स्तरीय समिति की अगली बैठक 6 अक्तूबर को होगी, जबकि 25 और 26 सितम्बर को भी बैठकें निर्धारित हैं।
उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन लेह की हिंसा सुनियोजित साजिश का नतीजा थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने माहौल बिगाड़ा है, उन्हें किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।