अमेरिका के राष्ट्रपति ने नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब हर H-1B वीजा पर कंपनियों को सालाना 1,00,000 डॉलर यानि लगभग 83 लाख रुपये फीस चुकानी होगी. यह कदम अमेरिका की टेक कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों, खास तौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस फैसले के बाद प्रवासी कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
सिलिकॉन वैली की कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे अमेरिका से बाहर यात्रा न करें। डर यह था कि बाहर जाने पर वापस लौटने में दिक्कत होगी। हालात बिगड़ते देख व्हाइट हाउस ने सफाई दी कि यह शुल्क केवल नए वीजा आवेदन पर और एक बार ही लागू होगा। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ मामलों में राष्ट्रीय हित को देखते हुए वीजा शुल्क में छूट दी जा सकती है. दरअसल H-1B वीजा उन एक्सपर्ट्स और ट्रेंड प्रोफेशनल्स के लिए अहम है, जो अमेरिका के हॉस्पिटल और आईटी कंपनियों में काम करने आते हैं. खासकर दूरदराज के इलाकों में ऐसी जगह पर जहां लोकल प्रोफेशनल्स उपलब्ध नहीं होते हैं, वहां विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता ज्यादा रहती है. ।
भारत के पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘ट्रंप का यह कदम अमेरिका के इनोवेशन को रोक देगा लेकिन भारत को और आगे बढ़ाएगा. अब नई रिसर्च, स्टार्टअप्स और पेटेंट्स बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम से निकलेंगे. अमेरिका का नुकसान भारत का फायदा बनेगा.’। भारत के पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अमेरिका इनोवेशन को चोट पहुंचाएगा और भारत के लिए अवसर लेकर आएगा. उन्होंने लिखा – ‘ट्रंप का यह कदम अमेरिका के इनोवेशन को रोक देगा लेकिन भारत को और आगे बढ़ाएगा. अब नई रिसर्च, स्टार्टअप्स और पेटेंट्स बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम से निकलेंगे. अमेरिका का नुकसान भारत का फायदा बनेगा.’