दिल्ली के विज्ञान भवन में 3 दिवसीय आरएसएस शताब्दी समारोह का आयोजन हुआ.तीसरे दिन नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई विषयों पर पूछे गए सवालों के विस्तृत जवाब दिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा- भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है। हमारे भाजपा सरकार ही नहीं सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं।
हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं हैं। संघ शताब्दी समारोह में कहा कि धर्म हर किसी के व्यक्तिगत पसंद का विषय है, इसमें किसी प्रकार का लालच या बल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. साथ ही यह भी कहा कि पूजा पद्धति बदल जाने से कौमें नहीं बदला करती.। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान भाजपा अध्यक्ष के चयन में आरएसएस की भूमिका पर बोलते हुए मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं शाखा चलाने में माहिर हूं, भाजपा सरकार चलाने में माहिर है, हम एक-दूसरे को सिर्फ सुझाव दे सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम फैसला नहीं करते, अगर हमें फैसला करना होता तो क्या इसमें इतना समय लगता। हिंदू धर्म की सोच के बारे में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “पहले दिन इस्लाम जब भारत में आया उस दिन से इस्लाम यहां है और आगे भी रहेगा. ये मैंने पिछली बार भी कहा था. इस्लाम नहीं रहेगा ये सोचने वाला हिंदू सोच का नहीं है. हिंदू सोच ऐसी नहीं है. दोनों जगह ये विश्वास बनेगा तब ये संघर्ष खत्म होगा. हम सभी को पहले ये मानना होगा कि हम सब एक हैं.” संघ प्रमुख ने कहा कि तकनीकी और आधुनिकता इनका शिक्षा से विरोध नहीं है। शिक्षा केवल जानकारी नहीं है, मनुष्य सुसंस्कृत बने।
नई शिक्षा नीति में पंचकोशीय शिक्षा का प्रावधान है। भारतीय ज्ञान परंपरा संघ का अभिन्न अंग रही है। हमारे एकात्मता स्त्रोत में प्रतिदिन हमारे ऋषियों और आधुनिक वैज्ञानिकों के नामों का पाठ किया जाता है। उनके जीवन को बौद्धिक वर्गों में भी शामिल किया गया है। संघ प्रमुख, प्रधानमंत्री से छह दिन पहले 75 वर्ष के हो जाएंगे। 75 साल की उम्र में रिटायर होने के सवाल पर भागवत ने कहा, मैंने कभी नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए। हम वही करेंगे जो संघ हमें कहेगा।
पीएम-सीएम को जेल जाने पर पद से हटाने वाले नए बिल पर संघ प्रमुख ने कहा कि नेतृत्व-नेताओं की छवि साफ होना चाहिए। इस पर कानून बने या नहीं ये संसद तय करेगी।
RSS के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। आज कार्यक्रम का आखिरी दिन था, जिसमें प्रश्नोत्तर सत्र हुआ।