सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भागे

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भागे

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भाग चुके हैं। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके परिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश में शरण दी है. पहले खबर आई थी कि असद की विमान का रडार से संपर्क टूट गया था. विमान के क्रैश होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी, लेकिन अब उनके रूस में शरण लेने की पुष्टि हो चुकी है. असल में सीरिया में पिछले 11 दिनों से विद्रोही गुटों और सेना के बीच कब्जे के लिए लड़ाई चल रही थी। विद्रोही लड़ाकों ने रविवार को राजधानी दमिश्क पर कब्जा कर लिया है। असद के देश छोड़ने के बाद सीरियाई PM ने विद्रोहियों को सत्ता सौंपने का प्रस्ताव दिया है। PM मोहम्मद गाजी अल जलाली ने एक वीडियो में कहा है कि वो देश में ही रहेंगे और जिसे भी सीरिया के लोग चुनेंगे, उसके साथ मिलकर काम करेंगे।

59 वर्षीय बशर अल-असद ने अपने पिता हाफ़िज़ अल-असद की मृत्यु के बाद साल 2000 में सीरिया की सत्ता संभाली थी. साल 2011 के विरोध प्रदर्शनों का सामना करते हुए उन्होंने अपने पिता के क्रूर तरीकों को अपनाया और सीरिया को गृहयुद्ध में झोंका दिया |

तख्तापलट के पीछे हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) का सबसे बड़ा हाथ रहा है. एचटीएस जो उत्तर-पश्चिम में एक गुट है, उसने फ्री सीरियन आर्मी और कई दूसरे छोटे गुटों के साथ मोर्चा संभालाते हुए राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बेदखल किया है.

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक सीरिया में तख्तापलट की मुख्य वजह इस साल शुरू हुआ विद्रोह था. कमजोर हुई सेना समेत रूस और ईरान जैसे सहयोगियों से घटता सपोर्ट एचटीएस के लिए फायदेमंद साबित हुआ. एचटीएस की अगवुाई में विपक्षी ताकतों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया.

34 साल की उम्र में विदेश से डॉक्टर की पढ़ाई किए हुए असद, बेहद सौम्य स्वभाव के और टेक्नो सेवी लगते थे. साल 2000 में जब असद के शासन की सीरिया में एंट्री हुई थी तो माना जाता था कि वे अपने पिता कि छवि से उलट देश में कई बड़े बदलाव लाएंगे और संघर्षों को खत्म करेंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

  • 59 वर्षीय बशर अल-असद ने अपने पिता हाफ़िज़ अल-असद की मृत्यु के बाद 2000 में सत्ता संभाली.
  • साल 2011 के विरोध प्रदर्शनों का सामना करते हुए उन्होंने अपने पिता के क्रूर तरीकों को अपनाया.
  • बशर अल-असद ने सीरिया को गृहयुद्ध में झोंका दिया.
  • जिसमें कथित तौर पर पांच लाख लोग मारे गए और आधी जनसंख्या को बेघर होना पड़ा.
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