भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक उच्चस्तरीय समिति ने वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है, जिसे “FREEAI” (Framework for Responsible and Ethical Enablement of AI) नाम दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं में AI का अधिकतम लाभ उठाना है, जबकि इसके संभावित जोखिमों, जैसे डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदम में पक्षपात, और साइबर सुरक्षा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। समिति ने यह भी माना कि AI के गलत उपयोग से वित्तीय असमानता या निर्णयों में पक्षपात जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, इसलिए यह ढांचा बेहद जरूरी है।
FREEAI मॉडल के तहत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया है। इसमें डेटा सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए मानकों का निर्माण, और बैंकों एवं NBFCs में AI मॉडल्स की निगरानी के लिए एक मजबूत तकनीकी आधार की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, समिति ने एक AI Ethics Oversight Committee गठित करने का प्रस्ताव रखा है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि AI आधारित निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। यह समिति वित्तीय संस्थानों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एल्गोरिदम की समीक्षा कर सकेगी और आवश्यक सुधार भी सुझाएगी।
इस नीति के अंतर्गत RBI ने AI के विकास के लिए एक विशेष फंड की भी सिफारिश की है, जिससे भारतीय वित्तीय संस्थाएं उन्नत तकनीक को अपनाने में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। यह फंड स्टार्टअप्स, फिनटेक कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को रिसर्च एवं नवाचार के लिए समर्थन प्रदान करेगा। कुल मिलाकर, FREEAI ढांचा न केवल तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देता है बल्कि भारत में वित्तीय समावेशन, उपभोक्ता संरक्षण और संस्थागत जवाबदेही को भी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।