‘कॉरपोरेट हितों के लिए बनाए गए कानून’, नए लेबर कोड्स पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे

‘कॉरपोरेट हितों के लिए बनाए गए कानून’, नए लेबर कोड्स पर भड़के मल्लिकार्जुन खरगे

नई दिल्ली, 11 मई (Political Insight): कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार ने विधानसभा चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को अधिसूचित किया है, जो देश के करोड़ों मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी प्रकार की चर्चा और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाए इन कानूनों को लागू किया है। उन्होंने कहा कि ये कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाले हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, नए वेतन कानून में न्यूनतम मजदूरी तय करने के पुराने मानकों को समाप्त कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की आय प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि नए नियमों के कारण कर्मचारियों की “टेक होम सैलरी” भी कम हो सकती है।

उन्होंने कहा कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता के तहत कार्यस्थल सुरक्षा को कमजोर किया गया है और कई मामलों में सुरक्षा उल्लंघनों को आपराधिक कार्रवाई के बजाय केवल जुर्माने से निपटाने का प्रावधान किया गया है। खरगे ने औद्योगिक संबंध संहिता 2020 को भी मजदूर विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अब 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियों को छंटनी के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, हड़ताल से पहले 60 दिन का नोटिस अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी “श्रमिक न्याय एजेंडा” के तहत मनरेगा के विस्तार, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये, स्वास्थ्य के अधिकार कानून (25 लाख रुपये तक), असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने और सरकारी कार्यों में संविदाकरण रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही पार्टी श्रम कानूनों में किए गए इन बदलावों की समीक्षा की मांग भी करती है।

महाराष्ट्र, 11 मई (Political Insight): महाराष्ट्र की राजनीति में मंत्री नितेश राणे के बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। राणे ने AIMIM और पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोला है। नितेश राणे ने कहा कि AIMIM एक “आतंकी संगठन” की तरह काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ओसामा बिन लादेन और असदुद्दीन ओवैसी में ज्यादा अंतर नहीं है। राणे ने आरोप लगाया कि जिस तरह ओसामा बिन लादेन अल-कायदा की मदद से काम करता था, उसी तरह ओवैसी अपनी पार्टी AIMIM के जरिए काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चुने जाने के बाद से अब तक AIMIM ने कोई बड़ा जनहित का कार्य नहीं किया है और पार्टी का एजेंडा केवल “जिहाद की राजनीति” तक सीमित है। राणे ने यह भी कहा कि जिस प्रकार कुछ संगठनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसी तरह AIMIM पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

नितेश राणे ने कहा कि “क्या हमने अशोक खरात का समर्थन किया? किसी भी हिंदू नेता या संगठन ने उनका साथ नहीं दिया। हमारे हिंदू समाज का स्पष्ट कहना है कि दोषियों को फांसी दी जानी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि “निदा खान के बारे में बोलने की हिम्मत क्यों नहीं की जाती, यह भी बताया जाना चाहिए।”

इससे पहले भी पिछले सप्ताह शुक्रवार को नितेश राणे ने AIMIM को “आतंकवादी संगठन” करार दिया था। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी के एक पार्षद पर नासिक के टीसीएस यौन उत्पीड़न और कथित जबरन धर्मांतरण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को पनाह देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। 

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