संसद में आज अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान

संसद में आज अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान

नई दिल्ली:- संसद में आज वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे चरण की अनुपूरक अनुदान मांगों (Supplementary Demands for Grants) पर चर्चा होगी और उसके बाद लोकसभा में इस पर मतदान कराया जाएगा। वित्त मंत्री चर्चा का जवाब देंगी। इन अनुपूरक अनुदान मांगों के माध्यम से सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि की स्वीकृति लेती है।

वहीं, राज्य सभा में आज भी ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा जारी रहेगी, जिसमें ग्रामीण रोजगार, बुनियादी ढांचे और गरीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति पर सांसद अपनी राय रखेंगे।

हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भारत की स्थिति पर दिया बयानः-

इस बीच, गुरुवार को लोकसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात के बावजूद भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति मजबूत और स्थिर बनी हुई है।

मंत्री ने बताया कि देश में रसोई गैस की घरेलू आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और गैस सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक की औसत समय-सीमा लगभग ढाई दिन ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि करीब 35 करोड़ परिवारों तक रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है, विशेषकर गरीब और वंचित वर्ग के लिए। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और दीर्घकालिक आयात समझौतों के माध्यम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रही है।

हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि रसोई गैस को लेकर लोगों में घबराहट का माहौल है और छोटे कारोबारियों पर इसका असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई रेस्तरां संचालकों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं को गैस की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता है।
राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता उसके ऊर्जा सुरक्षा ढांचे पर निर्भर करती है, इसलिए सरकार को आपूर्ति के साथ-साथ कीमतों को नियंत्रित रखने और छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों को विविध बनाया है और रणनीतिक भंडार के कारण फिलहाल ऊर्जा आपूर्ति पर कोई तत्काल संकट नहीं है। संसद में इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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