काठमांडू:- नेपाल में संसदीय चुनावों की मतगणना के साथ ही शुरुआती रुझान सामने आने लगे हैं और इनमें नए राजनीतिक दलों का दबदबा दिख रहा है। शुरुआती रुझानों में रवि लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन शाह को बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। इन रुझानों से पारंपरिक वामपंथी दलों और पुराने दिग्गज नेताओं के सामने कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
सबसे दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है। यहां काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर रहे बालेन शाह ने मतों की गिनती में चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शुरुआती राउंड में काफी पीछे छोड़ दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह मुकाबला नेपाल की पारंपरिक राजनीति और नए राजनीतिक विकल्पों के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है।
165 सीटों के रुझान आने शुरूः-
मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने बताया कि चुनाव आयोग का लक्ष्य 9 मार्च तक मतगणना पूरी करने का है। नेपाल की संसद के लिए 165 सीटों पर ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ (प्रत्यक्ष चुनाव) प्रणाली के तहत मतदान हुआ है, जिनके रुझान सामने आने लगे हैं। इसके अलावा 110 सीटों का फैसला ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व’ प्रणाली के तहत होगा।
शुरुआती रुझानों के मुताबिक 165 सीटों में से 44 सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) आगे चल रही है। वहीं शेर बहादुर देउबा की पार्टी नेपाली कांग्रेस 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। अपदस्थ प्रधानमंत्री ओली की पार्टी CPN-UML 4 सीटों पर आगे है, जबकि पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी केंद्र) 3 सीटों पर बढ़त पर है।
काठमांडू-1 सीट पर RSP की बड़ी जीतः-
इस बीच काठमांडू-1 सीट पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को महत्वपूर्ण जीत मिली है। यहां पार्टी की उम्मीदवार रंजू दर्शना ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।
इसके अलावा चितवन-2 सीट पर रवि लामिछाने बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि चितवन-3 में RSP की सोबिता गौतम पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल की बेटी रेणु दहल से आगे चल रही हैं।
‘Gen Z’ आंदोलन के बाद पहला चुनावः-
आपको बता दे कि यह चुनाव पिछले वर्ष सितंबर 2025 में हुए ‘Gen Z’ आंदोलन के बाद कराया जा रहा है। उस आंदोलन के दौरान युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिनमें कई लोगों की मौत भी हुई थी। व्यापक जनदबाव के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा था और अंतरिम व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का रास्ता साफ हुआ था।
युवाओं और नए दलों की बढ़ती भूमिकाः-
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के चुनाव में युवा मतदाताओं और नए राजनीतिक दलों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और पारंपरिक दलों से नाराजगी जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को नए विकल्पों की ओर आकर्षित किया है।
नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में कुल 275 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 138 सीटों की जरूरत होगी। ऐसे में अंतिम परिणाम आने के बाद गठबंधन की राजनीति भी अहम भूमिका निभा सकती है।