थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिवसीय श्रीलंका दौरे पर

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिवसीय श्रीलंका दौरे पर

नई दिल्ली/कोलंबो:- भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आज श्रीलंका पहुंचे। यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-श्रीलंका के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग को और मजबूत करना है। जनरल द्विवेदी श्रीलंकाई सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रमोद सोमवीरा, रक्षा राज्य मंत्री और रक्षा सचिव सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। ये चर्चाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास, खुफिया साझेदारी और क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहेंगी।

भारतीय थलसेना प्रमुख रक्षा सेवा कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (DSCSC) में वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करेंगे और बटाला स्थित आर्मी वार कॉलेज में अधिकारियों तथा प्रशिक्षुओं के साथ संवाद साधेंगे। यात्रा के दौरान दोनों पक्ष हाल के संयुक्त अभ्यासों- ‘ जैसे ‘मित्र शक्ति’ (थल-नौसेना संयुक्त)- की समीक्षा करेंगे और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श होगा। जनरल द्विवेदी श्रीलंका की स्वतंत्रता दिवस (4 फरवरी) से पूर्व इस यात्रा पर आ रहे हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को गति देने वाला कदम है।

भू-रणनीतिक महत्व और चीन के प्रभाव का मुकाबला

यह यात्रा भारत-श्रीलंका सैन्य सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति- भारत के दक्षिण में—चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति (हंबनटोटा बंदरगाह पट्टे के बाद) को संतुलित करती है। 2025 में श्रीलंका ने चीनी प्रभाव कम करने के लिए भारत की ओर रुख किया, जिसके तहत भारत ने 500 करोड़ रुपये का रक्षा ऋण और ड्रोन प्रशिक्षण प्रदान किया। जनरल द्विवेदी की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा (नवंबर 2024 में नियुक्ति के बाद) ‘SAGAR’ (सुरक्षा और ग्रोथ फॉर ऑल इन रीजन) पहल को मजबूत करेगी। विश्लेषकों का मानना है कि चर्चाओं में समुद्री डकैती, चरमपंथ और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन प्रमुख होंगे।

सैन्य सहयोग का विस्तार: आंकड़े और भविष्य:-

आपको बताते चलें कि पिछले पांच वर्षों में द्विपक्षीय सैन्य आदान-प्रदान 30% बढ़ा है- 2025 में 150 श्रीलंकाई अधिकारी भारत में प्रशिक्षित हुए। संयुक्त अभ्यास ‘मित्र शक्ति-IX’ (2025) ने जंगल युद्ध और काउंटर-इंसर्जेंसी पर फोकस किया। भारत ने श्रीलंका को स्वाति रडार और ब्रह्मोस क्षेपणास्त्र प्रशिक्षण दिए हैं। यह यात्रा आईएनएस विक्रांत के श्रीलंका दौरे (दिसंबर 2025) के बाद आ रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देगी। हालांकि, श्रीलंका के आंतरिक तमिल मुद्दे और चीनी कर्ज जाल चुनौतियां बने रहेंगे। यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार 2026 तक 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

जनरल द्विवेदी की यह यात्रा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को मजबूत करने वाली है, जो हिंद महासागर में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करेगी।

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