नई दिल्ली/लक्जमबर्ग:- भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों लक्जमबर्ग के दौरे पर हैं। मंगलवार को उन्होंने लक्जमबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से सौहार्दपूर्ण भेंट की, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। जयशंकर ने इसे सम्मानजनक मौका बताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने ग्रैंड ड्यूक की भारत के प्रति सकारात्मक भावनाओं और द्विपक्षीय साझेदारी को प्रगाढ़ बनाने के दृष्टिकोण की सराहना की।
इससे पूर्व, जयशंकर ने लक्जमबर्ग विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ बैठक की। चर्चा फिनटेक, अंतरिक्ष, डिजिटल क्षेत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित रही। जयशंकर ने कहा, “भारत और लक्जमबर्ग इन क्षेत्रों में और अधिक प्रोडक्टिव तरीके से सहयोग कर सकते हैं। यहां हमारा एक सक्रिय भारतीय समुदाय है और मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन फिनटेक, स्पेस, डिजिटल दुनिया और एआई में हम पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से मिलकर काम कर सकते हैं।”
वही विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक परिस्थितियों पर खुली चर्चा का स्वागत किया और कहा कि इससे दोनों देशों को लाभ होगा। उन्होंने बेटेल के गर्मजोशीपूर्ण स्वागत और व्यक्तिगत समर्थन के लिए आभार जताया। लक्जमबर्ग- यूरोप का प्रमुख वित्तीय केंद्र- भारत के लिए रणनीतिक साझेदार है। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 1.5 बिलियन यूरो तक पहुंचा, जिसमें फिनटेक निवेश प्रमुख रहा। लक्जमबर्ग की स्पेस इंडस्ट्री (सेसिलियम सैटेलाइट लॉन्च) और भारत के इसरो के बीच सहयोग बढ़ रहा है। एआई में लक्जमबर्ग की एआई हब पहल भारत की डिजिटल इंडिया से जुड़ सकती है।
यह यात्रा भारत की ‘यूरोप फर्स्ट’ कूटनीति को मजबूत करती है, खासकर जी20 और क्वाड के बाद। जयशंकर की यह पहली लक्जमबर्ग यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है।