वॉशिंगटन/काराकास:- वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की हालिया कार्रवाई को लेकर वैश्विक राजनीति में साफ़ तौर पर दो धड़े बनते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर कई देशों ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए तीखी आलोचना की है, वहीं दूसरी ओर कुछ देशों ने अमेरिका के रुख का खुलकर समर्थन किया है। इस बीच भारत, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने संयम बरतते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान पर ज़ोर दिया है।
अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करने वाले देशः-
अमेरिका की इस कार्रवाई के विरोध में सामने आने वाले देशों की सूची काफ़ी लंबी है। जिसमें रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देशों ने इस कदम की आलोचना की है।
इन देशों का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई:-
- वेनेजुएला की संप्रभुता में हस्तक्षेप है
- अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है
- क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती है
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इस नीति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आलोचनाएं सामने आ रही हैं।
अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले देशः-
- वहीं, इस मुद्दे पर अमेरिका के पक्ष में खड़े देशों का मानना है कि यह कदम वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ज़रूरी है।
- अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने वाले देशों में अर्जेंटीना, इज़रायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं।
- इन देशों ने वेनेजुएला के मौजूदा शासन पर दमनकारी नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं।
भारत का संतुलित रुख: शांति और संवाद पर ज़ोरः-
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संयमित और संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दोनों देशों से शांति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “वेनेजुएला में हाल की घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं। भारत हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। हम वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। सभी संबंधित पक्षों से अपील है कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाएं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।”
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि उनकी सरकार शुरू से ही वेनेजुएला की स्थिति पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “इटली ने अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मादुरो द्वारा खुद को चुनावी विजेता घोषित किए जाने को कभी मान्यता नहीं दी। हमने सरकार की दमनकारी कार्रवाइयों की निंदा की है और वेनेजुएला के लोगों की लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद का समर्थन किया है।”
हालांकि मेलोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि
“इटली का मानना है कि तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप सही रास्ता नहीं है। लेकिन सरकार अपनी सुरक्षा पर होने वाले हाइब्रिड हमलों के खिलाफ बचाव के तौर पर सीमित दखल को उचित मानती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला में रहने वाले इटालियन नागरिकों की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ऑस्ट्रेलिया की अपील: तनाव बढ़ने से बचे-
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया सभी पक्षों से अपील करता है कि वे बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और तनाव न बढ़े।”
अल्बनीज ने आगे कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से वेनेजुएला में:
लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं के सम्मान को लेकर चिंतित रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करता रहेगा।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने वेनेजुएला में मौजूद अपने नागरिकों के लिए 24/7 आपातकालीन कांसुलर सहायता की व्यवस्था भी जारी रखने की बात कही है। हम यह कह सकते हैं कि वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भू-राजनीतिक हितों के चलते दुनिया स्पष्ट रूप से दो खेमों में बंटती जा रही है।
जहां कुछ देश इसे लोकतंत्र की रक्षा का कदम मान रहे हैं, वहीं कई देश इसे संप्रभुता पर हमला और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं। ऐसे में भारत, ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसे देशों की संवाद और कूटनीति पर ज़ोर देने वाली अपील इस संकट में संतुलन का संकेत देती है।