पाम बीच (फ्लोरिडा):- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मार-ए-लागो क्लब में बैठक की। ट्रंप ने संकेत दिए कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने का बड़ा समझौता पूरा होने के बहुत करीब है। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश ‘बहुत करीब’ पहुंच चुके हैं।
वहीं जेलेंस्की ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि दोनों देशों की टीमें अगले हफ्ते सभी मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए मिलेंगी। ट्रंप अगले महीने वाशिंगटन में यूक्रेनी और यूरोपीय नेताओं से बैठक करेंगे। बातचीत दो कार्य समूहों—सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों—के जरिए चलेगी। इनकी शर्तें जनवरी की शुरुआत में तय होंगी।
20 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव पर चर्चा के बाद जेलेंस्की ने कहा, “हमने शांति ढांचे के सभी पहलुओं पर महत्वपूर्ण प्रगति की। सुरक्षा गारंटी स्थायी शांति के लिए सबसे अहम है।”
यूरोपीय नेताओं के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल
इस बैठक में ट्रंप और जेलेंस्की ने यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन तथा ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल की। वॉन डेर लेयेन ने ‘ब्लूस्काई’ पर लिखा, “अच्छी प्रगति हुई है। मजबूत सुरक्षा गारंटी जरूरी है।”
शांति योजना में पश्चिमी यूरोप और कनाडा सैन्य सहायता देंगे। यूक्रेन अमेरिका से द्विपक्षीय समझौता चाहता है, जिसकी नींव यूरोपीय संघ सदस्यता होगी। ट्रंप ने इसका समर्थन किया: “यह मजबूत समझौता होगा, जिसमें यूरोपीय देश पूरी तरह शामिल होंगे।”
पुतिन से ट्रंप की लंबी बातचीत
जेलेंस्की से पहले ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक घंटे से ज्यादा बात की। ट्रंप ने कहा, “पुतिन इसे होते देखना चाहते हैं। मुझे उन पर भरोसा है।” क्रेमलिन प्रवक्ता यूरी उशाकोव के अनुसार, पुतिन ने ट्रंप से कहा कि कीव को रूस के रुख के अनुरूप साहसिक फैसला लेना होगा। ट्रंप ने माना कि यूक्रेन संकट उनकी सबसे बड़ी विदेश नीति चुनौती है।
चुनौतियां बरकरार: डोनबास और नाटो मुद्दा
आपको बताते चले कि अपने चुनाव प्रचार में ट्रंप ने 24 घंटे में युद्ध खत्म करने का वादा किया था, लेकिन 11 महीने बाद भी युद्ध जारी है। जिसमें डोनबास का भविष्य एक बड़ी बाधा है। रूस यह पूरा क्षेत्र चाहता है, जबकि जेलेंस्की सैन्य मुक्त क्षेत्र का प्रस्ताव दे चुके हैं। उशाकोव ने चेतावनी दी कि मोर्चे पर बदलते हालात में यूक्रेन को डोनबास पर जल्द फैसला लेना चाहिए।
ट्रंप ने सतर्कता बरतते हुए कहा, “यह समझौता पूरा न भी हो, तो आश्चर्य नहीं। कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।” शांति की उम्मीद जगी है, लेकिन यह रास्ता अभी भी कठिन बना हुआ है।