नई दिल्ली, May 18, (Political Insight) : भारत के विदेश मंत्रालय ने UAE के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले को लेकर गहरी चिंता जताई है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने इस हमले को बेहद खतरनाक और अस्वीकार्य बताया है। विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में कहा, “भारत संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु संयंत्र पर हुए हमले से बेहद चिंतित है। इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और यह एक खतरनाक स्थिति को जन्म दे सकती है। हम सभी पक्षों से तत्काल संयम बरतने तथा संवाद और कूटनीति की राह पर लौटने की अपील करते हैं।”
भारत की यह प्रतिक्रिया अबू धाबी के अल धाफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर कथित ईरानी ड्रोन हमले के बाद सामने आई है। UAE के आधिकारिक बयान के अनुसार, हमला पावर प्लांट के बाहर स्थित एक जनरेटर पर किया गया। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान या रेडियोधर्मी रिसाव की सूचना नहीं है।
UAE ने इस हमले को “बिना उकसावे की आतंकी कार्रवाई” करार देते हुए कहा कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। UAE के विदेश मंत्रालय ने इसे “खतरनाक घटनाक्रम”, “आक्रामकता का अस्वीकार्य कृत्य” और देश की सुरक्षा के लिए “प्रत्यक्ष खतरा” बताया।
वहीं, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा कि हमले के बाद प्लांट के पास आग लगने की घटना सामने आई, जिसके कारण एक रिएक्टर को आपातकालीन डीजल जनरेटर से बिजली आपूर्ति दी जा रही है। एजेंसी ने परमाणु स्थलों के आसपास अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस हमले के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम पर भी चिंताएं गहरा गई हैं।
क्या है बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र?
- बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी के अल धाफरा क्षेत्र में स्थित अरब जगत का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
- इस संयंत्र में 20 बिलियन डॉलर की लागत से स्थापित चार APR-1400 रिएक्टर हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 5,600 मेगावाट है।
- बराकाह संयंत्र अकेले ही UAE की लगभग 25% बिजली आवश्यकताओं को पूरा करता है।
- यह संयंत्र हर वर्ष करीब 2.2 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।