नई दिल्ली,7 अप्रैल (Political Insight)- आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर लंबे समय से जारी राजनीतिक अनिश्चितता अब खत्म हो गई है। केंद्र सरकार ने अमरावती को राज्य की आधिकारिक और स्थायी राजधानी घोषित कर दिया है। इस संबंध में सोमवार को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद लागू हुआ।
आपको बता दे कि यह फैसला आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत लिया गया, जिसे हाल ही में संसद द्वारा पारित किया था। कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह अधिनियम 2 जून 2024 से प्रभावी माना जाएगा। इस संशोधन के जरिए 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव करते हुए अमरावती को राज्य की एकमात्र राजधानी का दर्जा दिया गया है।
इस नए कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि ‘अमरावती’ के अंतर्गत वही क्षेत्र आएगा, जिसे आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2014 के तहत पहले से राजधानी क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया था। संसद ने 2 अप्रैल को इस विधेयक को अंतिम मंजूरी दी थी। राज्यसभा में इसे वॉइस वोट से पारित किया गया, जबकि लोकसभा ने एक दिन पहले इसे मंजूरी दी थी।
गौरतलब है कि इस फैसले के साथ ही राज्य में वर्षों से चल रही ‘तीन राजधानी’ की बहस पर पूर्ण विराम लग गया है और इसी के साथ अब भविष्य में राजधानी बदलने या तीन-राजधानी मॉडल लागू करने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। संसद में इस विधेयक पर करीब 35 सांसदों ने चर्चा की, जिसमें अधिकांश ने इसका समर्थन किया। हालांकि वाईएसआर (YSR) कांग्रेस पार्टी के कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया और इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया।
दरअसल, अमरावती परियोजना की नींव 2015 में तेलुगु देशम पार्टी के शासनकाल में रखी गई थी, जब किसानों से भूमि लेकर राजधानी निर्माण की योजना शुरू की गई थी। लेकिन 2019 में वाईएसआरसीपी (YSRCP) के सत्ता में आने के बाद इस परियोजना पर रोक लगा दी गई और तीन-राजधानी मॉडल का प्रस्ताव सामने आया।
हालांकि 2024 में टीडीपी (TDP) नेतृत्व वाले NDA के फिर से सत्ता में लौटने के बाद अमरावती को एकमात्र राजधानी बनाने का फैसला लिया गया और रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू किया गया। अब केंद्र सरकार के इस आधिकारिक नोटिफिकेशन के साथ अमरावती का भविष्य पूरी तरह स्पष्ट हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला न केवल प्रशासनिक स्थिरता लाएगा, बल्कि राज्य के विकास को भी नई दिशा देगा। वहीं, किसानों और निवेशकों के बीच भी इससे भरोसा मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।