Census 2027 की शुरुआत: आज से शुरू हुआ पहला चरण

Census 2027 की शुरुआत: आज से शुरू हुआ पहला चरण

नई दिल्ली,1अप्रैल (Political Insight)- देश में लंबे इंतजार के बाद दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या गणना प्रक्रिया, Census 2027 का पहला चरण आज से शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास है, क्योंकि इसे पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आयोजित किया जा रहा है।

आपको बता दे कि देश की यह जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में देश की आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। सरकार ने इसके लिए 1 मार्च, 2027 को संदर्भ तिथि निर्धारित की है।

पहले चरण के तहत विशेष रूप से नागरिकों को स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया गया है। यह सुविधा आज से शुरू होकर 15 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी, जिसमें लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद अपनी जानकारी को दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद 16 अप्रैल से 15 मई तक गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और आवास से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे।

गौर करने वाली बात यह है कि मकान सूचीकरण के दौरान देशभर के सभी भवनों और संरचनाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (जैसे पानी, बिजली, शौचालय) और परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें खास बात यह भी है कि इस बार हर भवन की जियो-टैगिंग (geo-taging) की जाएगी और उसे एक यूनिक आईडी(ID) नंबर दिया जाएगा, जिससे डेटा अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगा।

उल्लेखनीय है कि, इस विशाल कार्य के लिए सरकार ने 30 लाख से अधिक गणनाकर्मियों, पर्यवेक्षकों और अधिकारियों की तैनाती की है। साथ ही नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 16 भाषाओं में ऑनलाइन (Online) डेटा भरने की व्यवस्था की गई है।

वहीं जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें जनसंख्या से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जैसे आयु, लिंग, शिक्षा स्तर, व्यवसाय, प्रवासन और जाति संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी। खासतौर पर जाति आधारित आंकड़े जुटाने को लेकर इस बार काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि यह भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है।

केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये से अधिक का बजट मंजूर किया है। यह अब तक की सबसे महंगी जनगणनाओं में से एक मानी जा रही है।
वहीं, बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए अलग संदर्भ तिथि तय की गई है। इन इलाकों में मौसम की चुनौतियों को देखते हुए 1 अक्टूबर, 2026 को आधार तिथि रखा गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जनगणना के आंकड़े देश की आर्थिक योजना, संसाधनों के वितरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी नीतियों के निर्माण में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए आम नागरिकों की भागीदारी और सही जानकारी देना इस प्रक्रिया की सफलता के लिए जरूरी है।

इस बार डिजिटल (Digital) और स्व-गणना जैसे विकल्पों के चलते उम्मीद की जा रही है कि जनगणना-2027 पहले से ज्यादा तेज, पारदर्शी और सटीक होगी।

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