उपराष्ट्रपति C.P. राधाकृष्णन का महाराष्ट्र दौरा

उपराष्ट्रपति C.P. राधाकृष्णन का महाराष्ट्र दौरा

नई दिल्लीः- C.P. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद पहली बार 21 और 22 मार्च को महाराष्ट्र के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य के अलग-अलग शहरों में आयोजित शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर युवाओं, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद करेंगे। उनके इस दौरे को न केवल औपचारिक बल्कि जन-संपर्क और प्रेरणात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस दौरे की शुरुआत 21 मार्च को नागपुर से होगी, जहां उपराष्ट्रपति महर्षि व्यास सभागार में आयोजित भारतीय युवा संसद के 29वें राष्ट्रीय सत्र के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में देशभर से आए युवा प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और लोकतंत्र, नीति-निर्माण तथा समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति अपने संबोधन में युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर जोर देंगे।

नागपुर कार्यक्रम के बाद उपराष्ट्रपति मुंबई पहुंचेंगे, जहां वे लोक भवन में आयोजित रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। यह विश्वविद्यालय राज्य में कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करेंगे और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करेंगे। उनके संबोधन में कौशल आधारित शिक्षा, रोजगार के नए अवसरों और बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रहने की संभावना है।

इसी दिन उपराष्ट्रपति 64वें जैन दीक्षा समारोह में भी भाग लेंगे। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें कई श्रद्धालु दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होते हैं। उपराष्ट्रपति की इस कार्यक्रम में उपस्थिति सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान को भी दर्शाती है।

इस दौरे के दूसरे दिन, 22 मार्च को उपराष्ट्रपति पुणे के उरुली कंचन स्थित निसर्गोपचार आश्रम के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह आश्रम प्राकृतिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली के प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता है। यहां उपराष्ट्रपति स्वास्थ्य, प्राकृतिक उपचार और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर अपने विचार रख सकते हैं।
उपराष्ट्रपति का यह दौरा विभिन्न क्षेत्रों- युवा सशक्तिकरण, शिक्षा, कौशल विकास, आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य—को जोड़ता हुआ नजर आता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों में भागीदारी के माध्यम से वे समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह दो दिवसीय दौरा न केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना, शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना भी है। उपराष्ट्रपति के इस दौरे पर देशभर की नजरें बनी रहेंगी।

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