नई दिल्लीः- भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आगामी चुनावों तथा छह राज्यों में उप-चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, 16 मार्च को असम, केरल और पुडुचेरी के लिए अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं।
आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 60(ग) के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान लागू करते हुए 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और मतदाता सूची में चिन्हित दिव्यांग मतदाताओं को डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान की सुविधा प्रदान की है।
इन मतदाताओं को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए फॉर्म 12-D भरकर अधिसूचना जारी होने के पांच दिनों के भीतर अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से आवेदन करना होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदान कर्मी उनके घर जाकर मतदान प्रक्रिया पूरी कराएंगे, जिसकी जानकारी संबंधित उम्मीदवारों को भी दी जाएगी, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
मतदान के दिन आवश्यक सेवाओं—जैसे अग्निशमन, स्वास्थ्य, बिजली, यातायात, एम्बुलेंस, विमानन और सरकारी परिवहन—में कार्यरत मतदाता भी डाक मतपत्र सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपने विभाग के नामित नोडल अधिकारी के माध्यम से आवेदन करना होगा।
इसके अतिरिक्त, चुनाव कवरेज में लगे अधिकृत मीडिया कर्मियों को भी “अनुपस्थित मतदाता” की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे वे भी डाक मतपत्र के जरिए मतदान कर सकेंगे।
चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को डाक मतपत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे वे भरकर निर्दिष्ट सुविधा केंद्रों पर जमा करेंगे। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि इन केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
सशस्त्र बलों के मतदाताओं के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम’ (ETPBS) के माध्यम से मतपत्र इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इन मतदाताओं को डाक सेवा का कोई खर्च नहीं उठाना होगा।
आयोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह स्पष्ट किया है कि डाक मतपत्रों द्वारा डाले गए सभी मत 4 मई 2026 को सुबह 8 बजे तक संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के पास पहुंच जाने चाहिए। साथ ही, रिटर्निंग और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को इन प्रावधानों की पूरी जानकारी दें।
इस बार चुनावों में डाक मतपत्र की विस्तारित सुविधा को लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।