कोलकाता:- तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग द्वारा किए गए प्रशासनिक फेरबदल पर कड़ा असंतोष जताया है।
मुख्यमंत्री ने CEC ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का तबादला किया जाना “असामान्य और चिंताजनक” है।
ममता बनर्जी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि जिन अधिकारियों का तबादला किया गया, उनमें राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे अहम पद शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के अचानक फैसले प्रशासनिक निरंतरता और चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे निर्णय संघीय ढांचे के अनुरूप नहीः-
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से इस मामले पर पुनर्विचार करने और ऐसे बड़े स्तर के फेरबदल के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को भरोसे में लिए बिना इस तरह के फैसले लेने से संघीय ढांचे की भावना प्रभावित होती है।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अब तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर चुनाव के दौरान आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक बदलाव करता है, खासकर उन अधिकारियों के मामलों में जिन पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हों या जो लंबे समय से एक ही पद पर तैनात हों।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ सकता है, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील हो सकता है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार है।
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है। ऐसे में प्रशासनिक फेरबदल को लेकर उठे इस विवाद ने राज्य की सियासत को और भी तेज कर दिया है।