संसद के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन था. 21 जुलाई, सत्र की शुरुआत से अंतिम दिन तक, लगभग पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया. बीते एक महीने में संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा किया. खास तौर पर बिहार में SIR का मुद्दा सदन के अंदर और बाहर छाया रहा. विपक्षी सांसद सदन में SIR पर चर्चा की मांग उठाते रहे. जिसके बाद आज लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. बता दें कि इस सत्र में लोकसभा में 12 विधेयक पारित हुए. 419 प्रश्न शामिल किए गए. विपक्ष के हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन में गरिमापूर्ण तरीके से चर्चा होनी चाहिए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले सत्र के कामकाज का ब्योरा दिया, जो संसदीय उत्पादकता की एक निराशाजनक तस्वीर पेश करता है. उन्होंने बताया कि चर्चा के लिए कुल 120 घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्षी सदस्यों द्वारा बार-बार किए गए व्यवधानों के कारण सदन में महज 37 घंटे ही चर्चा हो सकी.। राज्यसभा में भी महज 38.88 प्रतिशत ही कामकाज हो पाया। बाकी सारे समय नारेबाजी, सदन में तख्तियां लहराना, विधेयकों की प्रतियां फाड़ना और लगातार व्यवधान के लिए ही यह सत्र जाना जाएगा। कुछ विधेयक जरूर पारित हुए लेकिन चर्चा नहीं हो सकी। चर्चा केवल ऑपरेशन सिंदूर पर हुई जो गरमागर्म रही। पीएम मोदी ने मॉनसून सत्र को विजयोत्सव वाला सेशन बताया था इसके बाद भी सदन में पहले दिन से आखिरी दिन तक विपक्ष ने हंगामा जारी रखा.बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन अहम बिल पेश किए. विपक्ष ने इन तीनों को बिलों के विरोध में सदन में जमकर हंगामा किया. विपक्ष के हंगामे के बीच ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह से बैन लगाने वाले ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन बिल 2025 को लोकसभा में पास हुआ.। संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन पीएम मोदी ने विपक्ष को लेकर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्ष चर्चा में शामिल हो सता था लेकिन उसने जमकर हंगामा किया. स्पीकर ने विपक्ष के रवैये पर निराशा जताई है. बैठक में सिर्फ एनडीए के नेता ही मौजूद रहे. । स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मॉनसून सत्र में कार्यसूची में 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे, लेकिन लगातार विपक्ष के हंगामे की वजह से मौखिक उत्तर के लिए सिर्फ 55 प्रश्न ही लिए जा सके. सत्र की शुरुआत में यह तय किया गया था कि इस सत्र में 120 घंटे चर्चा और संवाद होगा. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में भी इस पर सहमति थी. लेकिन लगातार गतिरोध और नियोजित व्यवधान की वजह से मुकिल से 37 घंटे ही काम किया जा सका.
संसद का मॉनसून सत्र 2025: हंगामे के बीच सिमटी कार्यवाही, सिर्फ 37 घंटे चर्चा
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