राहुल गांधी ने बिहार के सासाराम से शुरू की गई “वोटर अधिकार यात्रा” का शुभारंभ किया, जो 16 दिनों में लगभग 1,300 किलोमीटर का सफर तय करेगी और 20 जिलों को कवर करेगी। यह अभियान चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के खिलाफ जन-जागरण के उद्देश्य से शुरू हुआ, जिसे कांग्रेस “वोट चोरी” का प्रयास मानती है।
इस रैली में INDIA गठबंधन के प्रमुख नेताओं- लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, समेत अन्य वाम और क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने भाग लिया, जो विपक्ष की एकजुटता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दर्शाता है।
10 बड़ी बातें –
वोटर अधिकार यात्रा से वोट चोरी का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर वोटर लिस्ट में बदलाव कर रहा है—SIR के माध्यम से वोटर जोड़ना या हटाना, जो चुनाव में हेरफेर का प्रयास है।
सत्यापन में असमानता
उन्होंने सवाल उठाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंसम के बाद उनसे शपथपत्र मांगा गया, जबकि भाजपा नेताओं से ऐसा नहीं किया गया।
रूढ़िवादी विपक्ष की एकता
रैली में RJD, CPI(M), CPI(ML)-Liberation, VIP और CPI जैसे दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया, जो विपक्षी एकता का सशक्त संदेश था।
लालू यादव की आकर्षक शैली
लालू प्रसाद यादव ने अपनी चुटीली भोजपुरी शैली से सभा की महफिल लूट ली – “लागल-लागल झुलनिया में धक्का…” जैसे वाक्यांशों से जनसमूह को बांधा।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा
सांसद मलिकार्जुन खड़गे ने चेताया कि जब तक भाजपा सत्ता में होगी, संविधान और नागरिकों का अधिकार असुरक्षित रहेगा; चुनाव आयोग मोदी सरकार का एजेंट बन चुका है।
जन आक्रोश का मंच
रैली के दौरान “vote chor, gaddi chhor” जैसे नारों के साथ, जनता ने चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के विरोध में अपना रोष व्यक्त किया।
आदर्श घोषणा—16 दिन, 1300 किमी
यह यात्रा 16 दिनों और 1,300 किलोमीटर से अधिक मार्ग तय करेगी और 20 जिलों को शामिल करेगी, जिसका समापन पटना में 1 सितंबर को एक विशाल रैली से होगा।
युवा और पिछड़ों को संदेश
यात्रा ने युवाओं और वंचित वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया है, जिन्हें वोटर अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़ने का संकल्प लिया गया।
EC को जवाब दे या माफ़ी दो
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल को सात दिन के भीतर शपथपत्र देने या देश से माफ़ी मांगने का अल्टीमेटम दिया—अन्यथा उनके आरोप “निर्धारित” कहे जाएंगे।
NDA की आलोचना
NDA ने इस यात्रा को “राजनीतिक नाटक” कहा; बिहार विकास पर केंद्रित है, राजनीतिक तमाशा नहीं।
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