चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 65 लाख नामों की सूची अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। यह सूची सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी की गई है, जिसका उद्देश्य मतदाता प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया था कि वह हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण स्पष्ट करे। आयोग ने यह जानकारी जिलाधिकारियों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई है, और सभी राजनीतिक दलों व मतदाताओं को दाव और आपत्तियाँ दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि SIR का उद्देश्य सुधार था, न कि मतदाताओं का बहिष्कार। आयोग ने आरोपों की व्यर्थता बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया सभी राजनीतिक दलों के लिए समान रूप से लागू होती है। मतदाता 30 सितंबर से प्रारंभ हो रही अंतिम सूची में नाम जोड़ने या पुनः शामिल कराने के लिए दावे कर सकते हैं।