मेघालय के राजाजू और डिएंगन गांवों से करीब 4,000 टन कोयला अचानक गायब हो गया है, जिसे लेकर पूरे राज्य में हलचल मची हुई है। उच्च न्यायालय ने इस घटना पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है, लेकिन मामला अभी भी एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है — आखिर कोयला कहां गया?
इस गंभीर संकट के बीच मंत्री किरमेन शायला का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा, “कोयला बह गया होगा।” यह जवाब न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि सवाल भी उठाता है — क्या सरकार सच छुपाने की कोशिश कर रही है? क्या कोयले के गायब होने के पीछे किसी तरह की साजिश या भ्रष्टाचार छिपा है?
राज्य प्रशासन की जवाबदेही पर शक जताते हुए न्यायालय ने इस मामले की त्वरित और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं, जनता में इस पूरे मामले को लेकर संदेह और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोयले की इतनी बड़ी मात्रा के अचानक गायब हो जाने का रहस्य अब भी अनसुलझा बना हुआ है।
क्या यह केवल एक लापरवाही है, या फिर कहीं कुछ बड़ा खेल चल रहा है? क्या मंत्री का बयान सच को ढकने की कोशिश है? इस सवाल का जवाब आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मेघालय के इस कोयला मिस्ट्री ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।