जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 जुलाई को धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त है और 9 सितंबर को मतदान होगा। यदि विपक्ष उम्मीदवार नहीं खड़ा करता तो उपराष्ट्रपति निर्विरोध चुने जाएंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव में गुप्त मतदान होने से क्रॉस वोटिंग की संभावना बनी रहती है। संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के मनोनीत सदस्य और लोकसभा के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव का शेड्यूल
- निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव की अधिसूचना जारी करना- 07 अगस्त, 2025 (गुरुवार)
- नाम-निर्देशन करने की अंतिम तारीख-21 अगस्त, 2025 (गुरुवार)
- नाम-निर्देशनों की संवीक्षा की तारीख- 22 अगस्त, 2025 (शुक्रवार)
- अभ्यर्थिताएं वापस लेने की अंतिम तारीख- 25 अगस्त, 2025 (सोमवार)
- वह तारीख, जिस दिन मतदान, यदि आवश्यक हुआ, करवाया जाएगा- 09 सितंबर, 2025 (मंगलवार)
- मतदान का समय- पूर्वा. 10.00 से अप. 05.00 बजे तक
- वह तारीख, जिस दिन मतगणना, यदि आवश्यक हुई, करवाई जाएगी- 09 सितंबर, 2025 (मंगलवार)
बता दें कि राष्ट्रपति पर के उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों की तरफ से प्रस्तावित होना जरूरी है। इसके अलावा 20 सांसदों का समर्थन भी चाहिए।
उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए सबसे पहले निर्वाचक मंडल लिस्ट बनती है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और नामित सदस्य (सांसद) शामिल होते हैं। राज्यसभा में 233 निर्वाचित सांसद और 12 नामांकित सांसद, लोकसभा में 543 सांसद हैं। यानी कुल सांसदों की संख्या 788 है। मौजूदा समय में राज्यसभा में 5 और लोकसभा में एक सीट खाली है। इसलिए निर्वाचक मंडल में यह संख्या 782 है। इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव जीत में 391 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। वोटिंग तभी होती है, जब एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में होते हैं। अन्यथा एक उम्मीदवार होने पर प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत जाता है।
चुनाव में केवल सांसद मतदाता होते हैं। इसलिए यह प्रचार सीमित दायरे में होता है। मतदान के बाद ही रिजल्ट आ जाता है। उसकी वजह यह है कि दोनों सदनों के 782 सदस्य मतदान करते हैं। इनकी गणना कुछ घंटों में हो जाती है। जीत के लिए कुल वैध मतों का बहुमत यानी 50% से अधिक प्राप्त करना होता है। इसके बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं।
बता दें कि राष्ट्रपति की गैरमौजूदगी में उपराष्ट्रपति उनका काम संभालते हैं। भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है, जिन्हें 5 साल के लिए चुना जाता है। नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक उपराष्ट्रपति अपने पद पर रहते हैं। उपराष्टपति को राज्यसभा में बहुमत के जरिए पारित प्रस्ताव से पद से हटाया जा सकता है, जिसमें लोकसभा की सहमती ज़रुरी होती है।