सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA), 1986 में “कमजोर” दंड का जिक्र करते हुए आलोचना किए जाने के बाद, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में बिगड़ती वायु क्वालिटी से निपटने के लिए पराली जलाने पर जुर्माना दोगुना कर दिया है। बुधवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, पराली जलाने पर किसानों पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता खराब होती जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार ने भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद केंद्र सरकार ने यह आदेश जारी किया है। भारत सरकार ने इस संबंध में एक गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया है. इस नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि अगर कोई 2 से 5 एकड़ तक में पराली जलाते पकड़ा जाएगा तो उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ 5 एकड़ से अधिक पर पराली जलाते पकड़े जाने पर 30 हजार रुपये का का जुर्माना लगाया जाएगा. पहले, जुर्माना क्रमशः 2,500 रुपये, 5,000 रुपये और 15,000 रुपये तय किया गया था।
यहां ये भी बता दें कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के विश्लेषण के अनुसार शहर में 1 से 15 नवंबर तक प्रदूषण का चरम रहता है। इस दौरान पंजाब और हरियाणा में पराली खूब जलाई जाती है। धान की खेती के तुरंत बाद किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करना होता है। मशीनों से धान की कटाई की जाती है। समय कम होने की वजह से किसान खेत पर पड़ी पराली को आग लगा देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि मजदूरों की भारी कमी। वहीं पराली का बाजार भी नहीं है… जहां इसे बेचा जा सके। पराली जलाने की चरम अवधि के दौरान दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पीएम के स्तर में 30 प्रतिशत तक का योगदान पराली जलाने से होता है। वरिष्ठ पर्यावरणविद् सुनीता नारायण के मुताबिक सर्दियों में पराली जलाना दिल्ली-एनसीआर में खराब वायु गुणवत्ता के लिए प्राथमिक चिंता का विषय नहीं है। इसके बजाय शहर के भीतर परिवहन और उद्योगों समेत प्रदूषण के अन्य स्रोत अधिक चिंताजनक हैं।