सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को बुल्डोजर एक्शन पर सुनवाई हुई। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की लंबी सुनवाई के बाद बुल्डोजर एक्शन पर रोक का आदेश सुरक्षित रख लिया। हालांकि अंतरिम आदेश सड़कों फुटपाथों आदि पर धार्मिक संरचनाओं सहित किसी भी अनधिकृत निर्माण पर लागू नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं सभी नागरिकों के लिए दिशानिर्देश तय करेंगे। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर एक्शन नहीं रुकेगा। सड़क के बीच धार्मिक निर्माण गलत है। अवैध मंदिर, दरगाह को हटाना होगा। लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी कदम है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी शख्स आरोपी या दोषी है यह डेमोलेशन का आधार नहीं हो सकता है। देश भर के लिए इस मामले में गाइडलाइंस जारी होगा। कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुरक्षित रखा। फैसला सुनाए जाने तक बुलडोजर एक्शन पर रोक जारी रहेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, ‘यदि 2 संरचनाओं में उल्लंघन हुआ है और केवल 1 के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और आप पाते हैं कि पृष्ठभूमि में कोई अपराध है. यह समझौता करने योग्य या गैर समझौता करने योग्य अपराध हो सकता है. यदि आप शुरू में किसी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं और आपको जल्द ही उसका आपराधिक इतिहास पता चलता है तो, दो गलतियां एक सही नहीं बनाती हैं?
इस बारे में हमारी सहायता करें.एसजी तुषार मेहता ने कहा, ‘हमने यूपी मामले में पहले ही हलफनामा दाखिल कर दिया था कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है, किसी संपत्ति को गिराने का आधार नहीं हो सकता. नगर निगम कानून, नगर नियोजन नियमों का उल्लंघन होने पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए. साथ ही कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. इसके लिए पहले नोटिस जारी किए जाने चाहिए. पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. हम यह स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी मामले में आरोपी है या यहां तक कि बलात्कार, हत्या या आतंकवाद में भी दोषी है, उसे गिराने का आधार नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन अदालत की अवमानना माना जाएगा. अगर तोड़फोड़ अवैध पाई गई, तो संपत्ति को वापस करना होगा.