जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण के लिए मंगलवार (1 अक्टूबर) को 7 जिलों की 40 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। अनुच्छेद 370 खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव पहली बार हो रहा है। इसलिए उम्मीदवारों के बीच चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा ‘अनुच्छेद 370’ और ‘राज्य का दर्जा’ रहा।
अंतिम चरण के लिए 40 सीटों पर 415 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में 5060 पोलिंग स्टेशन पर 39 लाख से ज्यादा वोटर मतदान करेंगे। तीसरे फेज की 40 सीटों में से 24 जम्मू डिवीजन और 16 कश्मीर घाटी की हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, आखिरी फेज 415 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। इनमें 387 पुरुष और 28 महिला उम्मीदवार हैं। थर्ड फेज में 169 कैंडिडेट्स करोड़पति और 67 उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं। जम्मू के नगरोटा से भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह राणा की सबसे ज्यादा 126 करोड़ संपत्ति है। इस फेज में संसद हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु के बड़े भाई एजाज अहमद गुरु भी चुनावी मैदान में है। एजाज गुरु सोपोर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी हैं।
नॉर्थ कश्मीर की लंगेट सीट से इंजीनियर राशिद के भाई खुर्शीद अहमद शेख चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग बारामूला से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बेहतर सड़कें, सुरक्षित पेयजल, सस्ती बिजली और नागरिक सुविधाएं हर राजनीतिक दल के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा थीं, लेकिन आखिरकार लड़ाई उन लोगों के बीच थी जो ‘अनुच्छेद 370’ की बहाली और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देना चाहते थे।
दिलचस्प बात यह है कि ‘अनुच्छेद 370’ की बहाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण थी, लेकिन राज्य का दर्जा हर राजनीतिक दल द्वारा किए गए घोषणा पत्र में से एक वादा था। 40 सीटों पर कुल 415 उम्मीदवार मैदान में ,जम्मू में 109 उम्मीदवार, बारामूला में 101 उम्मीदवार, कुपवाड़ा में 59 उम्मीदवार, बांदीपोरा में 42 उम्मीदवार , उधमपुर में 37 उम्मीदवार , कठुआ में 35 उम्मीदवार ,सांबा में 32 उम्मीदवार शामिल हैं. 18 सितंबर को पहले फेज की 24 विधानसभा सीटों वोटिंग हुई। इस दौरान 61.38% वोटिंग हुई। वहीं 25 सितंबर को 6 जिलों की 26 विधानसभा सीटों 57.31% मतदान हुआ।
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