नई दिल्ली, 21 अप्रैल, (Political Insight): पश्चिम एशिया में जारी संकट और हॉर्मुज़ की जटिल स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय जहाजों के बीमा के लिए ₹12,980 करोड़ के संप्रभु गारंटी-समर्थित समुद्री बीमा पूल को मंजूरी दी है। इस कदम का उद्देश्य युद्ध जैसी परिस्थितियों, व्यापारिक बाधाओं और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद भारत के बाहरी व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना है।
हॉर्मुज़ में लगातार बढ़ती अस्थिरता के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में कई प्रमुख पुनर्बीमा कंपनियों (reinsurers) ने शिपिंग कंपनियों को कवर देने से पीछे हटना शुरू कर दिया है या फिर प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू स्तर पर यह जोखिम कवर कोष तैयार किया है।
यह कोष भारत के ध्वज वाले या भारत-नियंत्रित जहाजों के लिए उपयोगी होगा, जो भारत से संचालित होते हैं या भारत की ओर आते-जाते हैं। इससे शिपिंग कंपनियां कठिन परिस्थितियों में भी व्यापार जारी रख सकेंगी और देश की आर्थिक संप्रभुता मजबूत होगी।
₹12,980 करोड़ का यह बीमा पूल 10 वर्षों तक संचालित होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त 5 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके तहत जहाज (हुल और मशीनरी), कार्गो और युद्ध जोखिम जैसे सभी प्रमुख समुद्री जोखिमों को कवर किया जाएगा।
इस पूल में शामिल बीमा कंपनियों की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता लगभग ₹950 करोड़ होगी। साथ ही, भारत में ही देयता बीमा (liability insurance) का प्रबंधन, समुद्री बीमा विशेषज्ञता, क्लेम निपटान और कानूनी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि भारतीय शिपिंग सेक्टर वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।