दीवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है। AQI लेवल (Air Pollution) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके कारण सांस लेना दूभर हो रहा है। ऐसे में जो लोग घर से बाहर निकल रहे हैं, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। इस साल 2025 में दिवाली के बाद PM2.5 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया, जो पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा है. पटाखों, गाड़ियों की बढ़ती संख्या और मौसम की खराब स्थिति ने प्रदूषण को चरम पर पहुंचा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने रात 8 बजे से रात 10 बजे तक हरित पटाखों को अनुमति दी थी लेकिन इसकी आड़ में जमकर अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे भी छोड़े गए। ग्रीन पटाखों पर मिली छूट से उत्साहित दिल्लों वालों ने अब अपनी सांसे सांसत में डाल दी हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आशंका जताई है कि 22 से 24 अक्तूबर तक वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में रहेगी जिसकी वजह से सांस के मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या भी हो सकती है। मंगलवार को अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 2700 मीटर रही। वेंटिलेशन इंडेक्स 4000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। बवाना में 424 समेत कई इलाकों में एक्यूआई गंभीर और बेहद खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 का प्रदूषण चिंताजनक है. उन्होंने CPCB डेटा और मौसम विश्लेषण के आधार पर बात की. PM2.5 का ऊंचा स्तर ज्यादातर शहर के अलग-अलग हिस्सों में पटाखों से आया. हवा की गति बहुत कम (1 मी/सेकंड से नीचे थी, दिशा उत्तर-उत्तर-पश्चिम. इससे प्रदूषण एक जगह से दूसरे में नहीं फैला. नमी ग्रामीण इलाकों में 80% और शहर के बीच में 70% रही. ग्रीन पटाखों ने भी PM तेजी से बढ़ाया. प्रदूषण स्थानीय है, बाहर से नहीं आया. ग्रीन पटाखों की क्वालिटी जांचनी होगी.