जापान की साने ताकाइची मंगलवार को देश की प्रधानमंत्री चुनी गईं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में हुए चुनाव में 149 के मुकाबले 237 वोटों से जीत मिली।
निचले सदन के बाद, उन्हें ऊपरी सदन में भी चुना गया, जहां पहले दौर में बहुमत से एक वोट कम रहने के बाद, दूसरे वोट में उन्हें 125-46 वोटों से जीत मिली। पीएम बनने के बाद मोदी और ट्रम्प जैसे वर्ल्ड लीडर्स ने ताकाइची को बधाई दी है। 64 साल की ताकाइची काफी लंबे समय से एलडीपी के दक्षिणपंथी धड़े से जुड़ी रही हैं. अब उन्होंने दक्षिणपंथी जापान इनोवेशन पार्टी या इशिन नो काई के साथ एलडीपी का सीधा गठबंधन कराया है और यह गठबंधन ही उनके लिए प्रधान मंत्री पद सुनिश्चित करता है क्योंकि विपक्ष एकजुट नहीं है.।
इसी साल जुलाई में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। इस हार के तीन महीने बाद तक राजनीतिक शून्यता और खींचतान को समाप्त करते हुए साने ताकाइची पूर्व प्रधान मंत्री शिगेरु इशिबा की जगह लेने जा रही हैं। बता दें कि शिगेरु इशिबा केवल एक साल तक ही कुर्सी पर बने रहे। इशिबा ने पिछले मंगलवार को ही अपने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
जिसके बाद जापान में नए पीएम बनने का रास्ता साफ हो गया। ताकाइची एक हेवी-मेटल ड्रमर और एक बाइकर भी रही हैं। साल 1993 में वह अपने गृहनगर नारा में पहली बार चुनाव जीतीं। इसके बाद उन्होंने आर्थिक सुरक्षा, आंतरिक मामलों और लैंगिक समानता सहित कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है। ताकाइची मार्गरेट थैचर को एक राजनीतिक आदर्श मानती रही हैं। इसके अलावा वह शिंजो आबे के रूढ़िवादी दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत भी हैं। कहा जाता है कि ताकाइची बड़े स्तर पर विदेशों के मामलों में कट्टर रही हैं। वह जापान के युद्धकालीन इतिहास की समीक्षावादी हैं यासुकुनी तीर्थस्थल का नियमित दौरा भी करती रही हैं। ध्यान देने वाली बात है कि साने ताकाइची का ये नियमित दौरा पड़ोसी देश चीन को नाराज करता रहा है। बताया जाता है कि ताकाइची को चीन के प्रति सख्त और दक्षिण कोरिया के प्रति सतर्क माना जाता है।