दिल्ली सीएम की घोषणा होगी फेब्रुअरी 19 को

दिल्ली सीएम की घोषणा होगी फेब्रुअरी 19 को

दिल्ली का सीएम कौन होगा इसका फैसला 19 तारीख को हो जाएगा। 19 फरवरी को बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें औपचारिक रूप से दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी, जबकि 20 फरवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण आयोजित किया जाएगालेकिन सीएम चेहरा चुनने में हो रही देरी को लेकर तमाम तरह के क्यास लगाए जा रहे हैं।

दिल्ली में 5 फरवरी 2025 को विधानसभा चुनाव हुए और 8 फरवरी को नतीजे आएं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. 70 सीटों में 48 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला. लेकिन बीजेपी की शानदार जीत के बाद भी सवाल यही बरकरार है कि आखिर दिल्ली का नया सीएम कौन बनने वाला है? दिल्ली के सीएम पद की रेस में जो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं, उनमें बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, प्रवेश सिंह वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, राजौरी से विधायक बने मनजिंदर सिंह सिरसा और रोहिणी विधानसभा सीट से तीसरी बार चुनाव जीतने वाले विजेंद्र गुप्ता आदि का नाम शामिल है.

इन पांच नाम को लेकर चर्चाएं तेज है कि इन्हीं में कोई मुख्यमंत्री बन सकता है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी को तलाश ऐसे चेहरे की है, जिसके जरिए दिल्ली ही नहीं देशभर में संदेश जाए. ऐसा चेहरा हो जो लो प्रोफाइल रहते हुए पीएम नरेंद्र मोदी विजन को आगे बढ़ाए. महिला वर्ग आज देश में बड़ा वोटबैंक बन चुका है. पीएम नरेंद्र मोदी पहले ही महिला बिल के जरिए इस वर्ग को साधने की बड़ी कोशिश कर चुके हैं. एनडीए शासित 20 राज्यों में कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं है, ऐसे में बीजेपी किसी महिला को आगे कर देश में बड़ा संदेश दे सकती है. फिलहाल विधायक दल की बैठक में तय होगा.

दिल्ली में पंजाबी और सिक्ख वोटर सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण माना जाता है. बीजेपी पंजाब में अब तक मजबूत नहीं हो सकी है. अगर बीजेपी दिल्ली से लेकर पंजाब तक के समीकरणों को साधना चाहेगी तो किसी पंजाबी चेहरे को कमान मिल सकती है. दिल्ली में पंजाबी और सिख समुदाय को मिलाकर करीब 30 प्रतिशत बताई जाती है. पुर्वांचल बहुल सीटें बीजेपी जीतने में कामयाब रही. चूंकि साल के आखिर में बिहार में चुनाव है तो बीजेपी किसी पूर्वांचली चेहरे को भी कुर्सीं सौंपने का दांव चल सकती है. दिल्ली में 17 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी है. आरक्षित 12 में से सिर्फ 4 सीटें ही जीतने में पार्टी सफल हुई. दूसरी तरफ, जिस तरह से विपक्ष संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी को देशभर में घेरने की कोशिश करता है, उससे बीजेपी किसी दलित चेहरे के जरिए भी देश में संदेश दे सकती है.

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